शिक्षा के प्रसार के लिए नागरी लिपि का सर्वत्र प्रचार आवश्यक है। - शिवप्रसाद सितारेहिंद।

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देश पर मिटने वाले शहीदों की याद में - संपादक, भारत-दर्शन

स्वतंत्रता-दिवस के अवसर पर आप सभी को शुभ-कामनाएं।

 
आत्मकथ्य : बालेश्वर अग्रवाल - बालेश्वर अग्रवाल

जीवन के नब्बे वर्ष पूरे हो रहे हैं आज जब मैं यह सोच रहा हूँ, तो ध्यान में राष्ट्रकवि स्व. श्री माखन लाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध कविता 'पुष्प की अभिलाषा' की पक्तियां याद आ रही है।

 
न्यूज़ीलैंड की भारतीय पत्रकारिता - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

यूँ तो न्यूज़ीलैंड में अनेक पत्र-पत्रिकाएँ समय-समय पर प्रकाशित होती रही हैं सबसे पहला प्रकाशित पत्र था 'आर्योदय' जिसके संपादक थे श्री जे के नातली, उप संपादक थे श्री पी वी पटेल व प्रकाशक थे श्री रणछोड़ क़े पटेल। भारतीयों का यह पहला पत्र 1921 में प्रकाशित हुआ था परन्तु यह जल्दी ही बंद हो गया।

 
एलेक्सा और महान जी  - राजेशकुमार

महान जी का वास्तविक नाम क्या है, इस बारे में विद्वानों में इसी तरह से मतभेद है जैसा कि बड़े साहित्यकारों के नामों के मामले में होता है। महान जी हमेशा यह सिद्ध करने में लगे रहते हैं कि वे कितने महान है! ऐसे में लोगों को लगा कि उनका नाम ही महान है, इसलिए वे उन्हें महान जी पुकारने लगे।

 
सुनाएँ ग़म की किसे कहानी - अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ

सुनाएँ ग़म की किसे कहानी हमें तो अपने सता रहे हैं।
हमेशा सुबहो-शाम दिल पर सितम के खंजर चला रहे हैं।।

 

 

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