लोक-कथाएं | Folklores
हिंदी जाननेवाला व्यक्ति देश के किसी कोने में जाकर अपना काम चला लेता है। - देवव्रत शास्त्री।

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लोक-कथाएं

क्षेत्र विशेष में प्रचलित जनश्रुति आधारित कथाओं को लोक कथा कहा जाता है। ये लोक-कथाएं दंत कथाओं के रूप में एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में प्रचलित होती आई हैं। हमारे देश में और दुनिया में छोटा-बड़ा शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे लोक-कथाओं के पढ़ने या सुनने में रूचि न हो। हमारे देहात में अभी भी चौपाल पर गांववासी बड़े ही रोचक ढंग से लोक-कथाएं सुनते-सुनाते हैं। हमने यहाँ भारत के विभिन्न राज्यों में प्रचलित लोक-कथाएं संकलित करने का प्रयास किया है।

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सौदागर और कप्तान | सीख भरी कहानी  - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | Suryakant Tripathi 'Nirala'

एक सौदागर समुद्री यात्रा कर रहा था, एक रोज उसने जहाज के कप्‍तान से पूछा, ''कैसी मौत से तुम्‍हारे बाप मरे?"

 
चार मित्र | लोक-कथा - मुरलीधर जगताप

बहुत दिन पहले की बात है। एक छोटा-सा नगर था, पर उसमें रहने वाले लोग बड़े दिल वाले थे। ऐसे न्यारे नगर में चार मित्र रहते थे। वे छोटी उमर के थे, पर चारों में बड़ा मेल था। उनमें एक राजकुमार, दूसरा राजा के मंत्री का पुत्र, तीसरा साहूकार का लड़का और चौथा एक किसान का बेटा था। चारों साथ-साथ खाते-पीते और खेलते-घूमते थे।

 
ते ताही और बरसात - प्रीता व्यास 

बहुत पुरानी बात है। दादी की दादी की दादी से भी बहुत-बहुत पहले की। सफेद बादलों के देश में एक बार खूब बारिश हुई, खूब।  इतनी की सब जल-थल हो गया । एक गांव  (Kainga)  था जिसमें बसने वालों ने कहना शुरू कर दिया कि यह बारिश ते ताही ही लेकर आई है। ते ताही ने अपने जादू से सारी धरती को डुबो देने जितनी बारिश करवाई है। 

 
ब्लू माउंटेनस | ऑस्ट्रेलियन लोक-कथा - रोहित कुमार 'हैप्पी'

सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में अपने प्राकृतिक सौंदर्य से सभी को अभिभूत कर देने वाली 'ब्लू माउंटेनस' (Blue Mountains) के बारे में कहा जाता है कि कभी वे जीती-जागती तीन सुंदर युवतियां हुआ करती थीं ।

 

 

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