हमारी हिंदी भाषा का साहित्य किसी भी दूसरी भारतीय भाषा से किसी अंश से कम नहीं है। - (रायबहादुर) रामरणविजय सिंह।

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कविताएं

देश-भक्ति की कविताएं पढ़ें। अंतरजाल पर हिंदी दोहे, कविता, ग़ज़ल, गीत क्षणिकाएं व अन्य हिंदी काव्य पढ़ें। इस पृष्ठ के अंतर्गत विभिन्न हिंदी कवियों का काव्य - कविता, गीत, दोहे, हिंदी ग़ज़ल, क्षणिकाएं, हाइकू व हास्य-काव्य पढ़ें। हिंदी कवियों का काव्य संकलन आपको भेंट!

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एक अदद घर  - जयप्रकाश मानस | Jaiprakash Manas

जब
माँ
नींव की तरह बिछ जाती है
पिता
तने रहते हैं हरदम छत बनकर
भाई सभी
उठा लेते हैं स्तम्भों की मानिंद
बहन
हवा और अंजोर बटोर लेती है जैसे झरोखा
बहुएँ
मौसमी आघात से बचाने तब्दील हो जाती हैं दीवाल में
तब
नई पीढ़ी के बच्चे
खिलखिला उठते हैं आँगन-सा
आँगन में खिले किसी बारहमासी फूल-सा
तभी गमक-गमक उठता है
एक अदद घर
समूचे पड़ोस में
सारी गलियों में
सारे गाँव में
पूरी पृथ्वी में

 
विडम्बना - रीता कौशल

मैंने जन्मा है तुझे अपने अंश से
संस्कारों की घुट्टी पिलाई है ।
जिया हमेशा दिन-रात तुझको
ममता की दौलत लुटाई है ।

 
नया सबेरा - बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष

नए साल का,नया सबेरा,
जब, अम्बर से धरती पर उतरे,
तब,शान्ति,प्रेम की पंखुरियाँ,
धरती के कण-कण पर बिखरें।

 
कुछ झूठ बोलना सीखो कविता! - जयप्रकाश मानस | Jaiprakash Manas

कविते!
कुछ फरेब करना सिखाओ कुछ चुप रहना
वरना तुम्हारे कदमों पर चलनेवाला कवि मार दिया जाएगा खामखां
महत्वपूर्ण यह भी नहीं कि तुम उसे जीवन देती हो

 
हिन्दी भाषा - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' | Ayodhya Singh Upadhyaya Hariaudh

छ्प्पै

 
ठण्डी का बिगुल - सुशील कुमार वर्मा

शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के,
मौसम ने यूं पलटा खाया,
शीतल हो उठा कण-कण धरती का,
कोहरे ने बिगुल बजाया!

 
कुछ लिखोगे  - मिताली खोड़ियार

कुछ लिखोगे
तुमने कहा था न कुछ लिखोगे
लिखोगे धूप मेरे माथे पर
हथेलियों में बरसात का पानी लिखोगे
तुलिका में लिपटे रंगों की रंगीन तरलता लेकर
सूर्य की किरणों से पिघलते ध्रुवों के पानी में
लिखोगे मेरा नाम सांसों की गर्माहट से ?
बोलो न लिखोगे, क्या लिखोगे ?

 
अंतर्द्वंद्व - रीता कौशल

ऐ मन! अंतर्द्वंद्व से परेशान क्यों है?
जिंदगी तो जिंदगी है, इससे शिकायत क्यों है?

 
वो था सुभाष, वो था सुभाष - रोहित कुमार 'हैप्पी'

वो भी तो ख़ुश रह सकता था
महलों और चौबारों में।
उसको लेकिन क्या लेना था,
तख्तों-ताज-मीनारों से!
         वो था सुभाष, वो था सुभाष!

 

 

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