अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

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लघुकथाएं

लघु-कथा, *गागर में सागर* भर देने वाली विधा है। लघुकथा एक साथ लघु भी है, और कथा भी। यह न लघुता को छोड़ सकती है, न कथा को ही। संकलित लघुकथाएं पढ़िए -हिंदी लघुकथाएँप्रेमचंद की लघु-कथाएं भी पढ़ें।

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प्रवासी - रोहित कुमार ‘हैप्पी'

विदेश से भारत लौटने पर--

--तू विदेश छोड़कर भारत क्यों लौट आया? रवि के दोस्त ने सवाल किया।
--वहाँ अपनापन नहीं लगता था। अपना देश अपना होता है, यार।
--तू पागल है! ...पर चल तेरी मरज़ी।

फिर पता नहीं क्या हुआ कि तीन साल तक भारत में रहने के बाद अचानक रवि सपरिवार दुबारा विदेश को रवाना हो गया।

 
कमरा - सुभाष नीरव

"पिताजी, क्यों न आपके रहने का इंतजाम ऊपर बरसाती में कर दिया जाए? " हरिबाबू ने वृद्ध पिता से कहा। "देखिए न, बच्चों की बोर्ड-परीक्षा सिर पर हैं। बड़े कमरे में शोर-शराबे के कारण वे पढ़ नहीं पाते। हमने सोचा, कुछ दिनों के लिए यह कमरा उन्हें दे दें।" बहू ने समझाने का प्रयत्न किया।

 
चर्चा जारी है - स्नेह गोस्वामी

रामप्रसाद और जमना दोनों ने एक के ऊपर एक रखी कुर्सियों को कतारों में लगाया। पूरा मैदान तरतीब से लगी कुर्सियों से सज गया। गेट से लेकर मंच तक लाल मैट बिछाया, फिर दोनों ने लाल मैट पर झाङू लगा दी।

 

 

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