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काव्य

जब ह्रदय अहं की भावना का परित्याग करके विशुद्ध अनुभूति मात्र रह जाता है, तब वह मुक्त हृदय हो जाता है। हृदय की इस मुक्ति की साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द विधान करती आई है उसे काव्य कहते हैं। कविता मनुष्य को स्वार्थ सम्बन्धों के संकुचित घेरे से ऊपर उठाती है और शेष सृष्टि से रागात्मक संबंध जोड़ने में सहायक होती है। काव्य की अनेक परिभाषाएं दी गई हैं। ये परिभाषाएं आधुनिक हिंदी काव्य के लिए भी सही सिद्ध होती हैं। काव्य सिद्ध चित्त को अलौकिक आनंदानुभूति कराता है तो हृदय के तार झंकृत हो उठते हैं। काव्य में सत्यं शिवं सुंदरम् की भावना भी निहित होती है। जिस काव्य में यह सब कुछ पाया जाता है वह उत्तम काव्य माना जाता है।

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पन्‍द्रह अगस्‍त - गिरिजाकुमार माथुर | Girija Kumar Mathur

आज जीत की रात
पहरुए, सावधान रहना!
खुले देश के द्वार
अचल दीपक समान रहना।

 
देश - शेरजंग गर्ग

ग्राम, नगर या कुछ लोगों का काम नहीं होता है देश
संसद, सड़कों, आयोगों का नाम नहीं होता है देश

 
बढ़े चलो! बढ़े चलो! - सोहनलाल द्विवेदी | Sohanlal Dwivedi

न हाथ एक शस्त्र हो
न हाथ एक अस्त्र हो,
न अन्न, नीर, वस्त्र हो,
हटो नहीं,
डटो वहीं,
बढ़े चलो!
बढ़े चलो!

 
वंदन कर भारत माता का | काका हाथरसी की हास्य कविता - काका हाथरसी | Kaka Hathrasi

वंदन कर भारत माता का, गणतंत्र राज्य की बोलो जय ।
काका का दर्शन प्राप्त करो, सब पाप-ताप हो जाए क्षय ॥

 
हम स्वेदश के प्राण - गयाप्रसाद शुक्ल सनेही

प्रिय स्वदेश है प्राण हमारा,
हम स्वदेश के प्राण।

आँखों में प्रतिपल रहता है,
ह्रदयों में अविचल रहता है
यह है सबल, सबल हैं हम भी
इसके बल से बल रहता है,

और सबल इसको करना है,
करके नव निर्माण।
हम स्वदेश के प्राण।

यहीं हमें जीना मरना है,
हर दम इसका दम भरना है,
सम्मुख अगर काल भी आये
चार हाथ उससे करना है,

इसकी रक्षा धर्म हमारा,
यही हमारा त्राण।
हम स्वदेश के प्राण।

 
आज़ादी - हफ़ीज़ जालंधरी

शेरों को आज़ादी है, आज़ादी के पाबंद रहें,
जिसको चाहें चीरें-फाड़ें, खाएं-पीएं आनंद रहें।

 
हम होंगे कामयाब - गिरिजाकुमार माथुर | Girija Kumar Mathur

हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब एक दिन
ओ हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास,
हम होंगे कामयाब एक दिन॥

 
चाहता हूँ देश की.... - रामावतार त्यागी | Ramavtar Tyagi

मन समर्पित, तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

 
प्रेम पर दोहे  - कबीरदास | Kabirdas

प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय।
राजा-परजा जेहि रुचै, सीस देइ लै जाय॥

 
शहीद पूछते हैं  - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

भोग रहे जो आज आज़ादी
किसने तुम्हें दिलाई थी?
चूमे थे फाँसी के फंदे,
किसने गोली खाई थी?

 
जलियाँवाला बाग में बसंत - सुभद्रा कुमारी

यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते,
काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते।

 
देशभक्ति | Poem on New Zealand - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड


 
धरती बोल उठी - रांगेय राघव

चला जो आजादी का यह
नहीं लौटेगा मुक्त प्रवाह,
बीच में कैसी हो चट्टान
मार्ग हम कर देंगे निर्बाध।

 
फ़क़ीराना ठाठ | गीत - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

आ तुझको दिखाऊँ मैं अपने ठाठ फ़क़ीराना
फाकों से पेट भरना और फिर भी मुसकुराना। 
आ तुझको दिखाऊँ मैं--------

 
भारत भूमि - तुलसीदास

भलि भारत भूमि भले कुल जन्मु समाजु सरीरु भलो लहि कै।
करषा तजि कै परुषा बरषा हिम मारुत धाम सदा सहि कै॥
जो भजै भगवानु सयान सोई तुलसी हठ चातकु ज्यों ज्यौं गहि कै।
न तु और सबै बिषबीज बए हर हाटक कामदुहा नहि कै॥

 
तुझ बिन कोई हमारा - रामप्रसाद बिस्मिल

तुझ बिन कोई हमारा, रक्षक नही यहाँ पर;
ढूँढा जहान सारा, तुम सा नही रखैया॥

 
जीवन से बाजी में, समय देखो जीत गया - अनिल जोशी | Anil Joshi

जीवन से बाजी में, समय देखो जीत गया

 
देश पीड़ित कब तक रहेगा - डॉ रमेश पोखरियाल निशंक

अगर देश आँसू बहाता रहा तो,
ये संसार सोचो हमें क्या कहेगा?
नहीं स्वार्थ को हमने त्यागा कहीं तो
निर्दोष ये रक्त बहता रहेगा,
ये शोषक हैं सारे नहीं लाल मेरे
चमन तुमको हर वक़्त कहता रहेगा।
अगर इस धरा पर लहू फिर बहा तो
ये निश्चित तुम्हारा लहू ही बहेगा,
अगर देश आँसू बहाता रहा तो,
ये संसार सोचो हमें क्या कहेगा?
अगर देश को हमसे मिल कुछ न पाया
तो बेकार है फिर ये जीवन हमारा,
पशु की तरह हम जिए तो जिए क्या
थूकेगा हम पर तो संसार सारा।
जतन कुछ तो कर लो, सँभालो स्वयं को
भला देश पीड़ा यों कब तक सहेगा,
अगर देश आँसू बहाता रहा तो,
ये संसार सोचो हमें क्या कहेगा?
यौवन तो वो है खिले फूल-सा जो
चमन पर रहे, कंटकों में महकता,
शूलों से ताड़ित रहे जो सदा ही
समर्पित चमन पर रहे जो चमकता।
अँधेरा धरा पर कहीं भी रहे तो
ये जल-जल स्वयं ही सवेरा करेगा,
अगर देश आँसू बहाता रहा तो,
ये संसार सोचो हमें क्या कहेगा?
आँसू बहाए चमन, तुम हँसे तो
ये समझो कि जीवन में रोते रहोगे,
बलिदान देकर जो पाया वतन है
उसे भी सतत यों ही खोते रहोगे।
अगर ज्योति बनकर नहीं झिलमिलाए
तो धरती में जन-जन सिसकता रहेगा,
अगर देश आँसू बहाता रहा तो,
ये संसार सोचो हमें क्या कहेगा?

 
यदि देश के हित मरना पड़े - रामप्रसाद बिस्मिल

यदि देश के हित मरना पड़े, मुझको सहस्त्रों बार भी,
तो भी न मैं इस कष्ट को, निज ध्यान में लाऊं कभी।
हे ईश! भारतवर्ष में, शत बार मेरा जन्म हो,
कारण सदा ही मृत्यु का, देशोपकारक कर्म हो॥

 
ये देश है विपदा में - डॉ रमेश पोखरियाल निशंक

देश हमारा है विपदा में, साथी तुम उठ जाओ।
सब कुछ न्यौछावर कर दो,
देशभक्ति मन में भर दो,
तूफ़ानों के इस रस्ते में, साथी गीत विजय के गाओ,
देश हमारा है विपदा में, साथी तुम उठ जाओ।

 
मेरे देश का एक बूढ़ा कवि - अब्बास रज़ा अल्वी | ऑस्ट्रेलिया

फटे हुए लिबास में क़तार में खड़ा हुआ
उम्र के झुकाओ में आस से जुड़ा हुआ
किताब हाथ में लिये भीड़ से भिड़ा हुआ
कोई सुने या न सुने आन पे अड़ा हुआ

 
क्षणिका - डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड | न्यूज़ीलैंड

ना तुमने कुछ कहा, ना हमने कुछ कहा।
बस यूँ ही बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने
अपनी अपनी खामोशी में
सभी कुछ तो कह गए हम दोनों।

 
प्रार्थना - रामप्रसाद बिस्मिल

दुख दूर कर हमारे, संसार के रचैया!
जल्दी से दे सहारा, मंझदार में है नैया॥

 
कोरोना हाइकु  - सत्या शर्मा 'कीर्ति'

कोरोना मार
अन्तर्भेदी चीत्कार
सभी लाचार

 
मुक्ता - सोहनलाल द्विवेदी

ज़ंजीरों से चले बाँधने
आज़ादी की चाह।
घी से आग बुझाने की
सोची है सीधी राह!

 
भारत न रह सकेगा ... - शहीद रामप्रसाद बिस्मिल

भारत न रह सकेगा हरगिज गुलामख़ाना।
आज़ाद होगा, होगा, आता है वह जमाना।।

 
लोकतंत्र का ड्रामा देख  - हलचल हरियाणवी

विदुर से नीति नहीं
चाणक्य चरित्र कहां
कुर्सी पर जा बैठे हैं
शकुनी-से मामा देख

 
सरफ़रोशी की तमन्ना  - पं० रामप्रसाद बिस्मिल

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है॥

 
सारे जहाँ से अच्छा - इक़बाल

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा ॥

 
दूर तक याद-ए-वतन आई थी समझाने को - रामप्रसाद बिस्मिल


हम भी आराम उठा सकते थे घर पर रह कर।
हम को भी पाला था माँ-बाप ने दुख सह सह कर।
वक़्त-ए-रुख़्सत उन्हें इतना भी न आए कह कर।
गोद में आँसू कभी टपके जो रुख़ से बह कर।
तिफ़्ल उन को ही समझ लेना जी बहलाने को॥

 
हमने कलम उठा नहीं रखी, गीत किसी के गाने को - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

हमने कलम उठा नहीं रखी, गीत किसी के गाने को॥

 
उसे यह फ़िक्र है हरदम  - भगत सिंह


 
सदुपदेश | दोहे  - गयाप्रसाद शुक्ल सनेही

बात सँभारे बोलिए, समुझि सुठाँव-कुठाँव ।
वातै हाथी पाइए, वातै हाथा-पाँव ॥१॥

 
सोशल मीडिया - अभय गौड़

सोशल मीडिया बन गया है एक नया संसार
जिसमें बढ़ता जा रहा है सूचना का भण्डार

 
भारति, जय विजय करे !  - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | Suryakant Tripathi 'Nirala'

भारति, जय विजयकरे!
कनक-शस्य कमलधरे!

 
व्यथा एक जेब कतरे की - डॉ रामकुमार माथुर

कोरोना से प्यारे अपना क्या हाल हो गया
जेबें ढीली पड़ गईं
और
पेट से पीठ का मिलन हो गया।
पॉकेटमार नाम है अपना
और
राम नाम जपना पराया माल हो अपना।
अच्छा धंधा था
यह अपना
लोगों की भारी भारी जेबों को
'हाथ की सफाई' से हल्की करना
फिर चैन से खाना-पीना और सोना।
अब कोरोनाकाल में
वही हाथ धो धो क
ये 'कलाकार' निढाल हो गया।
कोरोना से प्यारे अपना....

 
आत्म-दर्शन - श्रीकृष्ण सरल

चन्द्रशेखर नाम, सूरज का प्रखर उत्ताप हूँ मैं,
फूटते ज्वाला-मुखी-सा, क्रांति का उद्घोष हूँ मैं।
कोश जख्मों का, लगे इतिहास के जो वक्ष पर है,
चीखते प्रतिरोध का जलता हुआ आक्रोश हूँ मैं।

 
कौमी गीत  - अजीमुल्ला

हम हैं इसके मालिक हिंदुस्तान हमारा
पाक वतन है कौम का, जन्नत से भी प्यारा
ये है हमारी मिल्कियत, हिंदुस्तान हमारा
इसकी रूहानियत से, रोशन है जग सारा
कितनी कदीम, कितनी नईम, सब दुनिया से न्यारा
करती है जरखेज जिसे, गंगो-जमुन की धारा
ऊपर बर्फीला पर्वत पहरेदार हमारा
नीचे साहिल पर बजता सागर का नक्कारा
इसकी खाने उगल रहीं, सोना, हीरा, पारा
इसकी शान शौकत का दुनिया में जयकारा
आया फिरंगी दूर से, एेसा मंतर मारा
लूटा दोनों हाथों से, प्यारा वतन हमारा
आज शहीदों ने है तुमको, अहले वतन ललकारा
तोड़ो, गुलामी की जंजीरें, बरसाओ अंगारा
हिन्दू मुसलमाँ सिख हमारा, भाई भाई प्यारा
यह है आज़ादी का झंडा, इसे सलाम हमारा ॥

-- अजीमुल्ला

 
राष्ट्रीय एकता  - काका हाथरसी | Kaka Hathrasi

कितना भी हल्ला करे, उग्रवाद उदंड,
खंड-खंड होगा नहीं, मेरा देश अखंड।
मेरा देश अखंड, भारती भाई-भाई,
हिंदू-मुस्लिम-सिक्ख-पारसी या ईसाई।
दो-दो आँखें मिलीं प्रकृति माता से सबको,
तीन आँख वाला कोई दिखलादो हमको।

 
भारतवर्ष - श्रीधर पाठक

जय जय प्यारा भारत देश।
जय जय प्यारा जग से न्यारा,
शोभित सारा देश हमारा।
जगत-मुकुट जगदीश-दुलारा,
जय सौभाग्य-सुदेश॥
जय जय प्यारा भारत देश।

 
भारत माँ की लोरी - देवराज दिनेश

यह कैसा कोलाहल, कैसा कुहराम मचा !
है शोर डालता कौन आज सीमाओं पर ?
यह कौन हठी जो आज उठाना चाह रहा
हिम मंडित प्रहरी अपनी क्षुद्र भुजाओं पर ?

 
मरना होगा | कविता - जगन्नाथ प्रसाद 'अरोड़ा'

कट कट के मरना होगा।

 
स्वतंत्रता दिवस की पुकार  - अटल बिहारी वाजपेयी

पन्द्रह अगस्त का दिन कहता - आज़ादी अभी अधूरी है।
सपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी है॥

 
तेरी मरज़ी में आए जो - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

तेरी मरज़ी में आए जो, वही तो बात होती है
कहीं पर दिन निकलता है, कहीं पर रात होती है
कहीं सूखा पड़ा भारी, कहीं बरसात होती है
तेरी मरज़ी में आए जो, वही तो बात होती है

 
चेतावनी - हरिकृष्ण प्रेमी

है सरल आज़ाद होना,
पर कठिन आज़ाद रहना।  

 
इसको ख़ुदा बनाकर | ग़ज़ल - विजय कुमार सिंघल

इसको ख़ुदा बनाकर उसको खुदा बनाकर 
क्यों लोग चल रहे हैं बैसाखियां लगाकर

 
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो - हरिवंश राय बच्चन | Harivansh Rai Bachchan

इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बँधाए,
कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,
इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,
और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गँवाए!
किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा।
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

 
दो बजनिए | कविता - हरिवंश राय बच्चन | Harivansh Rai Bachchan

"हमारी तो कभी शादी ही न हुई,
न कभी बारात सजी,
न कभी दूल्‍हन आई,
न घर पर बधाई बजी,
हम तो इस जीवन में क्‍वांरे ही रह गए।"

 
स्वतंत्रता दिवस - हरिवंश राय बच्चन | Harivansh Rai Bachchan

आज से आजाद अपना देश फिर से!

 
प्रेम देश का... | ग़ज़ल  - डा. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

प्रेम देश का ढूंढ रहे हो गद्दारों के बीच
फूल खिलाना चाह रहे हो अंगारों के बीच

 
शुभेच्छा - लक्ष्मीनारायण मिश्र

न इच्छा स्वर्ग जाने की नहीं रुपये कमाने की ।
नहीं है मौज करने की नहीं है नाम पाने की ।।

नहीं महलों में रहने की नहीं मोटर पै चलने की ।
नहीं है कर मिलाने की नहीं मिस्टर कहाने की ।।

न डिंग्री हाथ करने की, नहीं दासत्व पाने की ।
नहीं जंगल में जाकर ईश धूनी ही रमाने की ।।

फ़क़त इच्छा है ऐ माता! तेरी शुभ भक्ति करने की ।
तेरा ही नाम धरने की तेरा ही ध्यान करने की ।।

तेरे ही पैर पड़ने की तेरी आरत भगाने की ।
करोड़ों कष्ट भी सह कर शरण तव मातु आने की ।।

नहीं निज बंधुओ को अन्य टापू में पठाने की ।
नहीं निज पूर्वजों की कीर्ति को दाग़ी कराने की ।।

चाहे जिस भांति हो माता सुखद निज-राज्य पाने की ।
मरण उपरान्त भी माता! पुन: तव गोद आने की ।।

 
शहीदों के प्रति  - भोलानाथ दर्दी

भइया नहीं है लाशां यह बे कफ़न तुम्हारा
है पूजने के लायक पावन बदन तुम्हारा

 
वीर सपूत - रवीन्द्र भारती | देशभक्ति कविता

गंगा बड़ी है हिमालय बड़ा है
तुम बड़े हो या धरती बड़ी है
तुम सरहदों पर रात दिन
जल रहे मशाल हो

 
वतन का राग - अफ़सर मेरठी

भारत प्यारा देश हमारा, सब देशों से न्यारा है।
हर रुत हर इक मौसम उसका कैसा प्यारा प्यारा है।
कैसा सुहाना, कैसा सुन्दर प्यारा देश हमारा हैं ।
दुख में, सुख में, हर हालत में भारत दिल का सहारा है ।
भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है॥

 
वो चुप रहने को कहते हैं | नज़्म - राम प्रसाद 'बिस्मिल'

इलाही ख़ैर वो हर दम नई बेदाद करते हैं।
हमें तुहमत लगाते हैं जो हम फ़र्याद करते हैं॥
कभी आज़ार देते हैं कभी बेदाद करते हैं।
मगर इस पर भी सौ जी से हम उनको याद करते हैं॥
असीराने कफ़स से काश ये सैयाद कह देता।
रहो आज़ाद होकर हम तुम्हें आज़ाद करते हैं॥
रहा करता है अहले ग़म को क्या-क्या इंतिज़ार उसका।
के देखें वो दिले नाशाद को कब शाद करते हैं॥
यह कह-कह कर बसर की उम्र हमने क़ैदे उल्फ़त में।
वो अब आज़ाद करते हैं, वो अब आज़ाद करते हैं॥
सितम ऐसा नहीं देखा, जफ़ा ऐसी नहीं देखी।
वो चुप रहने को कहते हैं जो हम फ़र्याद करते हैं॥
यह बात अच्छी नहीं होती यह बात अच्छी नहीं करते।
हमें बेकस समझ कर आप क्यों बरबाद करते हैं॥
कोई बिस्मिल बनाता है जो मक़तल में हमें 'बिस्मिल'।
तो हम डर कर दबी आवाज़ से फ़र्याद करते हैं॥

 
यह भारतवर्ष हमारा है - अमित अहलावत

मैं गर्व से यारों कहता हूँ, यह भारतवर्ष हमारा है

बना हुआ है दिल की धड़कन, सबकी आँखों का तारा है
अजब गजब यह देश निराला, ये जहाँ में सबसे प्यारा है
प्रेम सदभाव से खुदको जिसने, विश्व में ऊँचा उभारा है
मैं गर्व से यारों कहता हूँ, वह भारतवर्ष हमारा है

 
भारत माँ के अनमोल रतन - डॉ. कुमारी स्मिता

आज सस्मित रेखाएं,
खींची जो जन-जन के मुख पर
गर्व से आजाद घूमते
अधिकार है जिनका सुख पर!

 
फोटो - डॉ पंकज गौड़

फोटो!
फोटो मेरा पहला प्यार है
जीवनाधार है
कटिंग कर, बाल रंग, दाढी बना, क्रीम लगा
सेल्फी के मोस्ट ब्यूटी मोड में,
फोटो खींच,
सोशल मीडिया पे डालता हूं,
तो बहार आ जाती है!
समय के साथ पीढ़ियों
का स्वाद बदलता है।
पहले शादी ब्याह, कुआं पूजन, गृह प्रवेश के फोटो होते थे।
अब,सुबह-शाम-रात के फोटो,
अलग-अलग मिजाज के फोटो,
एक एक जज्बात के फोटो होते हैं।
राष्ट्र भक्त वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा भाले से,
मैं कैमरे से लड़ता हूं।
शब्द शिल्पी सत्य के सिपाही
माखनलाल चतुर्वेदी ने
लिखा कलम से,
मैं मोबाइल से लिखता हूं,
शहीदे आजम भगत सिंह
विचारों से इंकलाब लाए,
मेरा इंकलाबी हथियार फोटो है
अगर कोरोना हो तो
मैं कोरोना के खिलाफ फोटो डाल देता हूँ।
अगर किसान की दुर्दशा हो तो
मैं तो किसान का फोटो डाल देता हूं।
अगर जवान की समस्या हो तो,
मैं बॉर्डर की फोटो डाल देता हूं।
सरकार के खिलाफ गुस्सा हो,
तो सरकारी फोटो,
काम निकलवाना हो तो दरबारी फोटो,
छाना हो तो
अखबारी फोटो
मेरी हर समस्या का समाधान है
फोटो!
फोटो मुझे भीतर से गुदगुदाती है,
जब कोई अँगूठा उठाता है,
तो शरीर में सिहरन सी दौड जाती है
फोटो में बड़ी ताकत है,
5 बड़े लोगों के साथ फोटो खिंचा
आप बड़े हो जाते हैं।
पांच गिरे हुए लोगों का फोटो लगा,
आप खड़े हो जाते हैं।
मुझे वैज्ञानिकों से गिला है,
हमारे इतने सम्मान का
यह सिला है?
वह दिन कब आएगा
जब फोटो से प्यास बुझेगी
फोटो खेतों में फसल-सी लहलहाएगी
फोटो बोई-काटी जाएगी
फोटो से क्षुधा मिटेगी
वैज्ञानिक ढंग से श्रम करेंगे
तभी बात बनेगी।
मेरे एल्बम में अनेक फोटो हैं
आंसू की, हार की,
दर्द की,बहार की,
रूठते-मनाते प्यार की,
ना खत्म होने वाले इन्तज़ार की,
ऐसा नहीं,
मैं सिर्फ अपने फोटो खींचता हूं
मैं किसी की दुर्घटना देखता हूं
तो उसका फोटो खींच लेता हूं।
मरीज को तड़पते देखता हूं
तो उसका फोटो खींच लेता हूं।
लोगों को लड़ते देखता हूं तो
उनका फोटो खींच लेता हूं।
एक बार मैंने,
पाँच फुट के तालाब में डूबते हुए बच्चे का फोटो खींचा
अगर मैं चूक जाता तो बच्चा बच जाता
हाय! इतना दर्दीला फोटो नहीं आता
मानवता मेरे भीतर कूट-कूट कर भरी है
पर कभी दंभ नहीं किया
हँसी, खुशी, दर्द, इबादत
मेरे लिए फोटो हैं।
मुझे प्रसन्नता है
मैं अकेला नहीं,
मेरे साथ फोटो प्रेमियों की पूरी जमात है
सब के पास फोटो बेहिसाब है।
फोटो जीवंत संस्कृति है!
आने वाली पीढ़ियां कितनी प्रसन्न होंगी,
गर्व करेंगी,
आनंद,उत्साह-से भर जाएँगी!
उनके पूर्वजों ने,
नदी नहीं छोड़ी,पहाड़ नहीं छोडे
गिद्ध; तितली; गोरैया; गुलमोहर,
सृष्टि के श्रृंगार नहीं छोड़े।
छोड़ी हैं
बेहिसाब फोटो!
छोटी,बड़ी, श्वेत-श्याम,रंगीन,डिजिटल
फोटो!

 
भारत माता - मैथिलीशरण गुप्त | Mathilishran Gupt

(राष्ट्रीय गीत)

 
खूनी पर्चा - वंशीधर शुक्ल

अमर भूमि से प्रकट हुआ हूं, मर-मर अमर कहाऊंगा,
जब तक तुझको मिटा न लूंगा, चैन न किंचित पाऊंगा।
तुम हो जालिम दगाबाज, मक्कार, सितमगर, अय्यारे,
डाकू, चोर, गिरहकट, रहजन, जाहिल, कौमी गद्दारे,
खूंगर तोते चश्म, हरामी, नाबकार और बदकारे,
दोजख के कुत्ते खुदगर्जी, नीच जालिमों हत्यारे,
अब तेरी फरेबबाजी से रंच न दहशत खाऊंगा,
जब तक तुझको...।

 
उठो सोने वालों - वंशीधर शुक्ल

उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।
वतन के फ़क़ीरों का फेरा हुआ है॥

 
साँप! - अज्ञेय | Ajneya

साँप!

 
सुनो, तुम्हें ललकार रहा हूँ - अज्ञेय | Ajneya

सुनो, तुम्हें ललकार रहा हूँ, सुनो घृणा का गान!

 
पंद्रह अगस्त की पुकार - अटल बिहारी वाजपेयी | Atal Bihari Vajpayee

पंद्रह अगस्त का दिन कहता -
आज़ादी अभी अधूरी है।
सपने सच होने बाकी है,
रावी की शपथ न पूरी है।।

 
ऊँचाई | कविता - अटल बिहारी वाजपेयी | Atal Bihari Vajpayee

ऊँचे पहाड़ पर,
पेड़ नहीं लगते,
पौधे नहीं उगते,
न घास ही जमती है।

 
मेरे देश की माटी सोना | गीत  - आनन्द विश्वास (Anand Vishvas)

मेरे देश की माटी सोना, सोने का कोई काम ना,
जागो भैया भारतवासी, मेरी है ये कामना।
दिन तो दिन है रातों को भी थोड़ा-थोड़ा जागना,
माता के आँचल पर भैया, आने पावे आँच ना।

 
खूनी हस्ताक्षर - गोपालप्रसाद व्यास | Gopal Prasad Vyas

वह खून कहो किस मतलब का,
जिसमें उबाल का नाम नहीं ?
वह खून कहो किस मतलब का,
आ सके देश के काम नहीं ?

 
नेताजी का तुलादान - गोपालप्रसाद व्यास | Gopal Prasad Vyas

देखा पूरब में आज सुबह,
एक नई रोशनी फूटी थी।
एक नई किरन, ले नया संदेशा,
अग्निबान-सी छूटी थी॥

 
नारी - अमिता शर्मा

नारी तुम बाध्य नहीं हो,
हाँ, नहीं हो तुम बाध्य--
जीवनभर ढोने को मलबा
सड़ी-गली,थोथी, अर्थहीन परम्पराओं का।

 
मुस्कुराकर चल मुसाफिर - गोपाल दास 'नीरज'

पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर।
वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें?
हौसला वह क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें?
वह प्रगति भी क्या जिसे कुछ रंगिनी कलियाँ तितलियाँ,
मुस्कुराकर-गुनगुनाकर ध्येय-पथ, मंजिल भुला दें?
जिन्दगी की राह पर केवल वही पंथी सफल है,
आँधियों में, बिजलियों में जो रहे अविचल मुसाफिर!
पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर॥

 
आगे बढ़ेंगे  - अली सरदार जाफ़री

वो बिजली-सी चमकी, वो टूटा सितारा,
वो शोला-सा लपका, वो तड़पा शरारा,
जुनूने-बग़ावत ने दिल को उभारा,
बढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!

 
आज़ादी - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

भोग रहे हम आज आज़ादी, किसने हमें दिलाई थी!
                   चूमे थे फाँसी के फंदे, किसने गोली खाई थी?

 

 

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