साहित्य की उन्नति के लिए सभाओं और पुस्तकालयों की अत्यंत आवश्यकता है। - महामहो. पं. सकलनारायण शर्मा।

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पौराणिक-कथाएं

सभी त्योहारों से कोई न कोई पौराणिक कथा अवश्य जुड़ी हुई है और इन कथाओं का संबंध तर्क से न होकर अधिकतर आस्था से होता है। यह भी कहा जा सकता है कि पौराणिक कथाएं प्रतीकात्मक होती हैं।

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कुम्भ - समुद्र मंथन की कहानी  - भारत-दर्शन संकलन

कश्यप ऋषि का विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्रियों दिति और अदिति के साथ हुआ था। अदिति से देवों की उत्पत्ति हुई तथा दिति से दैत्य पैदा हुए। एक ही पिता की सन्तान होने के कारण दोनों ने एक बार संकल्प लिया कि वे समुद्र में छिपी हुई बहुत-सी विभूतियों एवं संपत्ति को प्राप्तकर उसका उपभोग करें। इस प्रकार समुद्र मंथन एक मात्र उपाय था।

 
महर्षि दुर्वासा देवराज इंद्र की कथा  - भारत-दर्शन संकलन

अपने क्रोध के लिए विख्यात महर्षि दुर्वासा ने किसी बात पर प्रसन्न होकर देवराज इंद्र को एक दिव्य माला प्रदान की। अपने घमण्ड में चूर होकर इन्द्र ने उस माला को ऐरावत हाथी के मस्तक पर रख दिया। ऐरावत ने माला लेकर उसे पैरों तले रौंद डाला। यह देखकर महर्षि दुर्वासा ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोध में आकर इन्द्र को शाप दे दिया।

 
प्रजापति कश्यप की दो पत्नियों की कथा  - भारत-दर्शन संकलन

एक बार प्रजापति कश्यप की दो पत्नियों विनता और कद्रू के बीच इस बात पर विवाद हो गया कि सूर्य के अश्व काले हैं या सफेद।

 
लोहड़ी लोक-गीत - रोहित कुमार 'हैप्पी'

लोहड़ी पर अनेक लोक-गीतों के गायन का प्रचलन है।

 
कुम्भ की पौराणिक कथाएं - भारत-दर्शन संकलन

कुम्भ भारतीय संस्कृति का महापर्व कहा गया है। इस पर्व पर स्नान, दान, ज्ञान मंथन के साथ-साथ अमृत प्राप्ति की बात भी कही जाती है।

 

 

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