वही भाषा जीवित और जाग्रत रह सकती है जो जनता का ठीक-ठीक प्रतिनिधित्व कर सके। - पीर मुहम्मद मूनिस।

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जनवरी-फरवरी 2020

जनवरी-फरवरी 2020

भारत के गणतंत्र दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। 


पिछले वर्ष 'भारत-दर्शन' के 10 लाख से भी अधिक पृष्ठ हर मास पढ़े जाते रहे हैं, इस स्नेह के लिए हम आपके आभारी हैं।  हमें विश्वास है कि इस वर्ष भी आपका स्नेह मिलता रहेगा। पुनश्च आभार। 

भारत-दर्शन का इस वर्ष का प्रवेशांक इस बार प्रशांत के साहित्य पर केंद्रित है। प्रशांत में तीन देश न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और फीजी ऐसे देश हैं जहां हिंदी में सृजन हो रहा है और दशकों से हो रहा है लेकिन फिर भी उनके हिंदी साहित्य को एक प्रबल पहचान मिलना जैसे अभी शेष है। 

इस बार इन्हीं न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और फीजी के साहित्यकारों व उनके साहित्य को प्रमुखता से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।  हमने एक पहल की है कि इन देशों के साहित्यकार एक मंच पर आएं और भारत-दर्शन के माध्यम से विश्व को अपना हिंदी साहित्य उपलब्ध करवाते हुए अपना पक्ष रखें। 

इस बार न्यूज़ीलैंड से स्व. महेन्द्र चन्द्र विनोद शर्मा की कहानी, प्रीता व्यास, दिनेश भारद्वाज, पुष्पा भारद्वाज-वुड, राजीव वाधवा, सुनीता शर्मा  की कविताएं, रोहित कुमार हैप्पी का काव्य, आलेख और साक्षात्कार, सोमनाथ गुप्ता की ग़ज़लें प्रकाशित की हैं। 

ऑस्ट्रेलिया की रीता कौशल, रेखा राजवंशी, अब्बास रजा अल्वी, हरिहर झा और विजय कुमार सिंह की रचनाएं सम्मिलित की हैं।   

फीजी से कमला प्रसाद मिश्र, जोगिन्द्र सिंह कंवल, अमरजीत कौर, सुभाशनी लता कुमार और जैनन प्रसाद की रचनायें पढ़ी जा सकती हैं।  हम पहली बार 'भारत-दर्शन' पर सुभाशनी लता की 'फीजी हिंदी' में लघुकथा 'फंदा' प्रकाशित कर रहे हैं।  इस फीजी हिंदी 'लघुकथा' पर आपकी टिप्पणियां विशेष रूप से वांछनीय हैं।  

मॉरीशस के अभिमन्यु अनत की लघु कथा और ब्रिटेन के प्रवासी कथाकार और बीबीसी की हिंदी सेवा के दिग्गज रहे कैलाश बुधवार की कहानी और मोहन राणा की कविताएं पठनीय हैं।  

उपरोक्त के अतिरिक्त काव्य, लोक कथाएं, लघु कथाएं, आलेख, साक्षात्कार और दोहे तो हर बार की तरह प्रकाशित किए ही गए हैं।   

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