रामचरित मानस हिंदी साहित्य का कोहनूर है। - यशोदानंदन अखौरी।

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हू केयर्स? - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

अगस्त का महीना विदेश में बसे भारतीयों के लिए बड़ा व्यस्त समय होता है। कम से कम हमारे यहां तो ऐसा ही होता है। स्वतंत्रता दिवस की तैयारी पूरे जोरों पर रहती है। अनेक संस्थाएं स्वतंत्रता दिवस का आयोजन करती हैं। नहीं, मैं गलत लिख गया! दरअसल, स्वतंत्रता दिवस नहीं, ‘इंडिपेंडेंस डे'! 'स्वतंत्रता-दिवस' तो न कहीं सुनने को मिलता, न कहीं पढ़ने को। मुझे तलख़ी आई तो साथ वाले ने वेद-वाणी उवाची, ‘हू केयर्स?' यही तो कठिनाई है कि आप ‘केयर' ही तो नहीं करते! ...और करते भी हैं तो जब आप पर आन पड़े, तभी करते हैं!

 
मक़सद | कविता - राजगोपाल सिंह

23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की 'देश-भक्ति' को अपराध की संज्ञा देकर फाँसी पर लटका दिया गया। कहा जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह तय की गई थी लेकिन किसी बड़े जनाक्रोश की आशंका से डरी हुई अँग्रेज़ सरकार ने 23 मार्च की रात्रि को ही इन क्रांति-वीरों की जीवनलीला समाप्त कर दी। रात के अँधेरे में ही सतलुज के किनारे इनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।

 
हँसते-हँसते फाँसी पर झूल गई यह देशभक्त तिकड़ी | 23 मार्च 1931  - भारत-दर्शन संकलन

अमर शहीद भगतसिंह का जन्म- 27 सितंबर, 1907 को बंगा, लायलपुर, पंजाब (अब पाकिस्तान में) हुआ था व 23 मार्च, 1931 को इन्हें दो अन्य साथियों सुखदेव व राजगुरू के साथ फांसी दे दी गई। भगतसिंह का नाम भारत के सवतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय है। भगतसिंह देश के लिये जीये और देश ही के लिए शहीद भी हो गए।

 
भगतसिंह की पसंदीदा शायरी  - भारत-दर्शन संकलन

उसे यह फ़िक्र है हरदम नया तर्ज़े-ज़फा क्या है,
हमे यह शौक़ है देखें सितम की इन्तहा क्या है।

 
आह्वान  - अशफ़ाक उल्ला खाँ

कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएँगे,
आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे।

 
सुनाएँ ग़म की किसे कहानी - अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ

सुनाएँ ग़म की किसे कहानी हमें तो अपने सता रहे हैं।
हमेशा सुबहो-शाम दिल पर सितम के खंजर चला रहे हैं।।

 
कैसे मनाएं होली?  - डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Dr Ved Pratap Vaidik

होली जैसा त्यौहार दुनिया में कहीं नहीं है। कुछ देशों में कीचड़, धूल और पानी से खेलने के त्यौहार जरूर हैं लेकिन होली के पीछे जो सांसारिक निर्ग्रन्थता है, उसकी समझ भारत के अलावा कहीं नहीं है। निर्ग्रन्थता का अर्थ ग्रंथहीन होना नहीं है। वैसे हिंदुओं को मुसलमान और ईसाई ग्रंथहीन ही बोलते हैं, क्योंकि हिंदुओं के पास कुरान और बाइबिल की तरह कोई एक मात्र पवित्र ग्रंथ नहीं होता है। उनके ग्रंथ ही नहीं, देवता भी अनेक होते हैं। मुसलमान और ईसाई अपने आप को अहले-किताब याने ‘किताबवाले आदमी' बोलते हैं।

 
उदयेश्वर नीलकंठेश्वर - डॉ प्रियंका जैन

उदयपुर का नाम लें और दिमाग में आता है - राजस्थान राज्य के मेवाड़ क्षेत्र में झीलों का शहर - उदयपुर!

 
सड़क पर बह निकली पुस्तक-गंगा - भारत-दर्शन समाचार

कनाडा का टोरोंटो शहर। बात 2016 की है। यहाँ की एक मुख्य सड़क पर हजारों पुस्तकें बिछा दी गईं। सड़क ऐसे जान पड़ती थी जैसे कि वहाँ पुस्तकों की बाढ़ आ गई हो। थोड़ी ऊंचाई से देखने पर ऐसा प्रतीत होता था जैसे यह एक पुस्तकों की नदी हो।

 
शब्द-चित्र काव्य - रोहित कुमार 'हैप्पी'

निम्न शब्द-चित्र काव्य में प्रत्येक पंखुड़ी में एक अक्षर है और चित्र के मध्य में 'न' दिया हुआ है।

 
भाई कुलतार सिंह के नाम भगतसिंह का अंतिम पत्र  - इतिहास के पन्ने

अजीज कुलतार,

 
23 मार्च 1931 को हँसते-हँसते फाँसी पर झूल गई यह देशभक्त तिकड़ी  - भारत-दर्शन संकलन

अमर शहीद भगतसिंह का जन्म- 27 सितंबर, 1907 को बंगा, लायलपुर, पंजाब (अब पाकिस्तान में) हुआ था व 23 मार्च, 1931 को इन्हें दो अन्य साथियों सुखदेव व राजगुरू के साथ फांसी दे दी गई। भगतसिंह का नाम भारत के सवतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय है। भगतसिंह देश के लिये जीये और देश ही के लिए शहीद भी हो गए।

 
न्यू मीडिया क्या है? - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

न्यू मीडिया क्या है?