Find Us On:

English Hindi
खेल हमारे (बाल-साहित्य ) 
   
Author:डा. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

गुल्ली डंडा और कबड्डी,
चोर-सिपाही आँख  मिचौली।  
कुश्ती करना, दौड़ लगाना
है अपना आमोद पुराना। 

खेल हमारे ऐसे होते,
ख़र्च न जिसमें पैसे होते।
मजा बहुत आता है इनमें,
बल भी बढ़ जाता है इनमें। 

निर्धन और धनी सब खेलें,
ख़ुश होते हैं जब-जब खेलें।
चौपड़ औ' शतरंज नाम के,
खेल हमारे बड़े काम के।  

नारी, नर, नृप खेला करते,
शक्ति बुद्धि की परखा करते। 
अंग्रेजों से हमने सीखे,
वॉलीबॉल, फुटबॉल सरीखे। 

फिर क्रिकेटर औ' हॉकी जैसे,
कैरम, टेबल टेनिस ऐसे।  
पर ये खेल बहुत ख़र्चीले,
कर देते हैं बटुए ढीले। 

--डॉ राणा प्रताप सिंह गन्नौरी  'राणा' 

Previous Page  | Index Page  |    Next Page
 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश