देहात का विरला ही कोई मुसलमान प्रचलित उर्दू भाषा के दस प्रतिशत शब्दों को समझ पाता है। - साँवलिया बिहारीलाल वर्मा।

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डा. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

डा. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

Author's Collection

Total Number Of Record :7
लाल बहादुर शास्त्री | कविता

लालों में वह लाल बहादुर,
भारत माता का वह प्यारा।
कष्ट अनेकों सहकर जिसने,
निज जीवन का रूप संवारा।

तपा तपा श्रम की ज्वाला में,
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भूल कर भी न बुरा करना | ग़ज़ल

भूल कर भी न बुरा करना
जिस क़दर हो सके भला करना।

सीखना हो तो शमअ़ से सीखो
दूसरों के लिए जला करना।

रह के तूफ़ां में हम ने सीखा है
तेज़ लहरों का सामना करना।

भूल कर ही सही कभी 'राणा'
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हिन्दी ही अपने देश का गौरव है मान है

पश्चिम की सभ्यता को तो अपना रहे हैं हम,
दूर अपनी सभ्यता से मगर जा रहे हैं हम ।

इस रोशनी में कुछ भी हमें सूझता नहीं,
अाँखे खुली हुई है मगर दीखता नहीं ।

इंगलिश का बोलबाला किया चाहते हैं हम
जो कुछ न चाहिए था किया चाहते हैं हम ।

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जिस तरफ़ देखिए अँधेरा है | ग़ज़ल

जिस तरफ़ देखिए अँधेरा है
यह सवेरा भी क्या सवेरा है

हम उजाले की आस रखते थे
अब अँधेरा अधिक घनेरा है

दैन्य, दुख, दर्द, शोक कुंठाएं
इन सभी ने मनुज को घेरा है

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मीठे बोल - डा राणा का बाल साहित्य

बच्चों के लिए लिखने वाले के पास बच्चों जैसा सरल एवं निश्छल मन भी होना चाहिए । प्राय: कहा जाता है कि बच्चों के लिए लिखने वालों की संख्या अधिक नहीं है । कुछ कलमकार बड़ों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी लिखते रहते हैं । ऐसे कलमकारों में आप मेरी गणना भी कर सकते हैं । कुछ ऐसे भी कलमकार हैं जो लिखते ही बच्चों के लिए हैं । हरियाणा में ऐसे कलमकार के रूप में: श्री घमंडी लाल अग्रवाल ने अपनी विशेष पहचान बनाई है ।

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प्रतिपल घूंट लहू के पीना | ग़ज़ल

प्रतिपल घूँट लहू के पीना,
ऐसा जीवन भी क्या जीना ।

बहुत सरल है घाव लगाना,
बहुत कठिन घावों का सीना ।

छेड़ गया सोई यादों को,
सावन का मदमस्त महीना ।

पीठ न वीर दिखाते रण में,
छलनी भी हो जाये सीना ।

जो मरने से तनिक न डरता,
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बात हम मस्ती में ऐसी कह गए | ग़ज़ल

बात हम मस्ती में ऐसी कह गए,
होश वाले भी ठगे से रह गए।

कष्ट जीवन में हमारे थे बहुत,
हम मगर हँसते हुए सब सह गए।

बढ़ गए, आगे बढ़े जिन के कदम,
रह गए जो लोग पीछे रह गए।

लाख चाहा था कि आँखों में रहें,
किंतु विह्वल अश्रु फिर भी बह गए।

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