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भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गाँधी जिन्हें बापू व महात्मा गांधी भी संबोधित किया जाता है का जन्म-दिवस हर वर्ष 2 अक्तूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इन दिनों 'गाँधी को राष्ट्र-पिता' कहे जाने का प्रश्न चर्चा में है। आइए देखें कि गाँधी को 'राष्ट्रपिता' कहा जाना कैसे आरंभ हुआ?
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| अनमोल वचन |
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यहाँ महात्मा गाँधी के कुछ अनमोल वचन संकलित किए गए हैं:
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| गाँधी राष्ट्र-पिता? |
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जब से सूचना का अधिकार आया है कई बार बड़ी हास्यास्पद परिस्थितियों से सामना हो जाता है। कुछ समय से यह मुद्दा बड़ा चर्चा में था, 'गाँधी को राष्ट्रपिता की उपाधि किसने दी?'
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| गाँधीवाद तो अमर है - डा अरूण गाँधी |
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डा अरूण गाँधी से बातचीत
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| गांधी जी के बारे में कुछ तथ्य |
यहाँ दिया जा रहा है कि गाँधी जि को 'महात्मा' व 'राष्ट्रपिता' कहा जाना कैसे चलन में आया:
- 12 जनवरी 1918 को गांधी द्वारा लिखे एक पत्र में रबीन्द्रनाथ टैगोर को ‘‘गुरुदेव’’ संबोधित किया गया था।
- टैगोर ने 12 अप्रैल 1919 को लिखे अपने एक पत्र में पहली बार गांधी को ‘महात्मा’ संबोधित किया था।
- पहली बार नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने रेडियो सिंगापुर से 6 जुलाई, 1944 को प्रसारित अपने भाषण में राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। वैसे ऐसा भी कहा जाता है कि नेताजी ने इससे पहले भी आजाद हिंद रेडियो रंगून से प्रसारित अपने एक संदेश में 4 जून 1944 को गांधीजी को "देश के पिता" कहकर संबोधित किया था।
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| जन-गण-मन साकार करो |
हे बापू, इस भारत के तुम, एक मात्र ही नाथ रहे, जीवन का सर्वस्व इसी को देकर इसके साथ रहे।
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| तीनों बंदर बापू के | कविता |
बापू के भी ताऊ निकले तीनों बंदर बापू के सरल सूत्र उलझाऊ निकले तीनों बंदर बापू के सचमुच जीवनदानी निकले तीनों बंदर बापू के ज्ञानी निकले, ध्यानी निकले तीनों बंदर बापू के जल-थल-गगन-बिहारी निकले तीनों बंदर बापू के लीला के गिरधारी निकले तीनों बंदर बापू के! सर्वोदय के नटवर लाल फैला दुनिया भर में जाल अभी जिएंगे ये सौ साल ढाई घर घोड़े की चाल मत पूछो तुम इनका हाल सर्वोदय के नटवर लाल! लंबी उमर मिली है, खुश हैं तीनों बंदर बापू के दिल की कली खिली है, खुश हैं तीनों बंदर बापू के बूढ़े हैं, फिर भी जवान हैं तीनों बंदर बापू के परम चतुर हैं, अति सुजान हैं तीनों बंदर बापू के सौवीं बरसी मना रहे हैं तीनों बंदर बापू के बापू को ही बना रहे हैं तीनों बंदर बापू के! खूब होंगे मालामाल खूब गलेगी उनकी दाल औरों की टपकेगी राल इनकी मगर तनेगी पाल मत पूछो तुम इनका हाल सर्वोदय के नटवर लाल! सेठों क हित साध रहे हैं तीनों बंदर बापू के युग पर प्रवचन लाद रहे हैं तीनों बंदर बापू के सत्य-अहिंसा फाँक रहे हैं तीनों बंदर बापू के पूँछों से छवि आँक रहे हैं तीनों बंदर बापू के दल से ऊपर, दल के नीचे तीनों बंदर बापू के मुस्काते हैं आंखें मीचे तीनों बंदर बापू के! छील रहे गीता की खाल उपनिषदें हैं इनकी ढाल उधर सजे मोती के थाल इधर जमे सतजुगी दलाल मत पूछो तुम इनका हाल सर्वोदय के नटवर लाल! मड़ रहे दुनिया-जहान को तीनों बंदर बापू के चिढ़ा रहे हैं आसमान को तीनों बंदर बापू के करें रात-दिन टूर हवाई तीनों बंदर बापू के बदल-बदल कर चखें मलाई तीनों बंदर बापू के गांधी-छाप झूल डाले हैं तीनों बंदर बापू के असली हैं, सर्कस वाले हैं तीनों बंदर बापू के! दिल चटकीला, उजले बाल नाप चुके हैं गगन विशाल फूल गए हैं कैसे गाल मत पूछो तुम इनका हाल सर्वोदय के नटवर लाल! हमें अँगूठा दिखा रहे हैं तीनों बंदर बापू के कैसी हिकमत सिखा रहे हैं तीनों बंदर बापू के प्रेम-पगे हैं, शहद-सने हैं तीनों बंदर बापू के गुरुओं के भी गुरू बने हैं तीनों बंदर बापू के सौवीं बरसी मना रहे हैं तीनों बंदर बापू के बापू को ही बना रहे हैं तीनों बंदर बापू के।
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| देखो बापू | कविता |
देखो बापू कितनी हिंसा है कितनी अराजकता है कितनी लंबी टाँगें हैं झूठ की फरेब की काली चादर ढक देती है सत्य का प्रकाश पर फिर भी देखो बापू सत्य डोलता है इन रगों में झूठ हार ही जाता है देखो बापू हार गए न दोनों झूठा गुरु और लुटेरा नेता -पूनम शुक्ला
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| दो अक्टूबर - रत्न चंद 'रत्नेश' |
लाल बहादुर, महात्मा गांधी लेकर आए ऐसी आंधी कायाकल्प हुआ देश का जन-जन में चेतना जगा दी।
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| बच्चों को ‘विश्व बंधुत्व’ की शिक्षा |
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(1) विश्व में वास्तविक शांति की स्थापना के लिए बच्चे ही सबसे सशक्त माध्यम:-
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| बापू महान | कविता |
बापू महान, बापू महान! ओ परम तपस्वी परम वीर ओ सुकृति शिरोमणि, ओ सुधीर कुर्बान हुए तुम, सुलभ हुआ सारी दुनिया को ज्ञान बापू महान, बापू महान!!
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| महात्मा गांधी -शांति के नायक |
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