अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

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अपना जीवन.... | ग़ज़ल (काव्य) 
   
Author:कुँअर बेचैन

अपना जीवन निहाल कर लेते
औरों का भी ख़याल कर लेते

जब भी पूछो हो हमसे पूछो हो
आज ख़ुद से सवाल कर लेते

दिल पे जादू है बस मुहब्बत का
आप भी यह कमाल कर लेते

गर न उन पर नजर तेरी होती
लोग क्या अपना हाल कर लेते

मौत के जाल से निकलते तो
ज़िंदगी को बहाल कर लेते

ए 'कुँअर' ख़ुद पे भी नज़र रखते
अपनी भी देखभाल कर लेते

- कुअँर बेचैन

 

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