वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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हिंदुस्तान (काव्य)

Author: मनमोहन झा की


धूर्तों का नारा
मूर्खों को चारा
सारे जहां से अच्छा
यह हिंदुस्तान हमारा ।

-मनमोहन झा

[ लगभग जीवन, संपादक- लीलाधर जगूड़ी सूर्य प्रकाशन मन्दिर, बीकानेर ]

 

 

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