जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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बाल-साहित्य

बाल साहित्य के अन्तर्गत वह शिक्षाप्रद साहित्य आता है जिसका लेखन बच्चों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखकर किया गया हो। बाल साहित्य में रोचक शिक्षाप्रद बाल-कहानियाँ, बाल गीत व कविताएँ प्रमुख हैं। हिन्दी साहित्य में बाल साहित्य की परम्परा बहुत समृद्ध है। पंचतंत्र की कथाएँ बाल साहित्य का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। हिंदी बाल-साहित्य लेखन की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। पंचतंत्र, हितोपदेश, अमर-कथाएँ व अकबर बीरबल के क़िस्से बच्चों के साहित्य में सम्मिलित हैं। पंचतंत्र की कहानियों में पशु-पक्षियों को माध्यम बनाकर बच्चों को बड़ी शिक्षाप्रद प्रेरणा दी गई है। बाल साहित्य के अंतर्गत बाल कथाएँ, बाल कहानियां व बाल कविता सम्मिलित की गई हैं।

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अक्कड़ मक्कड़ - भवानी प्रसाद मिश्र | Bhawani Prasad Mishra

अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़
दोनों मूरख, दोनों अक्खड़
हाट से लौटे, ठाठ से लौटे
एक साथ एक बाट से लौटे।

 
अनूठा लाल मोर | तेनाली  - भारत-दर्शन

विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय को अनूठी और दुर्लभ वस्तुओं का शौक था। महाराज ऐसी वस्तुएँ पाकर प्रसन्न होते और बदले में ढेर सारी राशि इनाम में देते थे। दरबारियों में राजा को भेंट करने की होड़ लगी रहती थी।

 
शतरंज का जादू - गुणाकर मुले

‘शतरंज के खेल के नियमों को आप न भी जानते हों तो कम से कम इतना तो सभी जानते हैं कि शतरंज चौरस पटल पर खेला जाता है । इस पटल पर ६४ छोटे-छोटे चौकोण होते हैं।

 
जैसे को तैसा - विष्णु शर्मा

"तुला लोहसहस्रस्य यत्र खादन्ति मूषिकाः।
 राजंस्तत्र हरेच्छयेनो बालकं नात्र संशयः ॥"

 
शेर और चूहा - ईसप

एक शेर जंगल में अपने पंजों पर अपना भारी भरकम सिर टिकाए आराम कर रहा था।  अचानक एक चूहा उसके ऊपर आ कर गिरा और डरकर शेर के मुख की और भागने लगा। शेर को बहुत गुस्सा आया। उसने चूहे को अपने पंजों में जकड लिया और कहा, "तेरी यह हिम्मत? मैं अभी तुझे खा सकता हूँ।"

 
माँ मारेंगी !  - रघुवीर शरण

अगर हाथ देंगे नाली में, माँ मारेंगी ।
अगर साथ देंगे गाली में माँ मारेंगी ॥
कपड़े मैले नहीं करेंगे, माँ मारेंगी ।
मिट्टी सर में नहीं भरेंगे, माँ मारेंगी ।

 

 

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