भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है। - (आचार्य) चतुरसेन शास्त्री।

Find Us On:

English Hindi
बाबा | हास्य कविता (काव्य)     
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

दूर बस्ती से बाहर
बैठा था एक फ़क़ीर
पेट से भूखा था
तन कांटे सा सूखा था।

बस्ती में फ़क़ीर की ऐसी हवा है
कहते हैं -
बाबा के पास हर मर्ज़ की दवा है।

आस-पास मिलने वालों की भीड थी
कोई लाया फूल, किसी के डिब्बे मे खीर थी।

फ़क़ीर से माँग रहे थे वे सब
जिनके मोटे-मोटे पेट थे
देखने में लगते सेठ थे।

बाबा के आगे शीश नवाते थे
फल, फूल, मेवे चढ़ाते थे
बदले में जाने क्या चाहते थे!

बाबा अपनी धुन में मस्त
कभी-कभी आँख उठाते थे,
'इनका पेट ना भरा, ना भरेगा'
सोचकर मुसकाते थे
फिर अपने आप में खो जाते थे।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

Back

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश