राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

Find Us On:

English Hindi
Loading
छीन सकती है नहीं सरकार वन्देमातरम् (काव्य)  Click To download this content
   
Author:भारत-दर्शन संकलन | Collections

छीन सकती है नहीं सरकार वन्देमातरम् ।
हम गरीबों के गले का हार वन्देमातरन्  ॥१॥

सर चढ़ों के सर में चक्कर उस समय आता जरूर ।
कान मे पहुँची जहाँ झन्कार वन्देमातरम् ॥२॥

हम वही है जो कि होना चाहिए इस वक़्त पर ।
आज तो चिल्ला रहा संसार वन्देमातरम् ॥३॥

जेल मे चक्की घसीटें, भूख से ही मर रहा ।
उस समय भी बक रहा बेज़ार वन्देमातरम् ॥४॥

मौत के मुहँ पर खड़ा है, कह रहा जल्लाद से-
भोंक दे सीने में वह तलवार  वन्दे मातरम ॥५॥

डाक्टरों ने नब्ज देखी, सिर हिला कर कह दिया ।
हो गया इसको तो यह आज़ार वन्देमातरम् ॥६॥

ईद, होली, दसहरा, सुबरात से भी सौगुना ।
है हमारा लाड़ला त्योहार वन्देमातरम् ॥७॥

जालिमों का जुल्म भी काफूर सा उड़  जायेगा ।
फैसला होगा सरे दरबार- वन्देमातरम्  ॥ ८ ॥

[स्वतंत्रता की झंकार ]

 

 

Previous Page  | Index Page  |    Next Page

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश