कोई कौम अपनी जबान के बगैर अच्छी तालीम नहीं हासिल कर सकती। - सैयद अमीर अली 'मीर'।
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भारत-दर्शन : हिंदी कहानियाँ, कविताएं और साहित्य (Hindi Stories, Poetry & Literature)

न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित 'भारत-दर्शन' मे स्वागत है। यहाँ आप साहित्य संकलन और भारत-दर्शन द्वै-मासिक पत्रिका के अतिरिक्त हिंदी के अनेक संसाधनों से लाभान्वित हो सकते हैं।

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ताज़ा अंक / Latest Issue

भारत-दर्शन पत्रिका

(सितंबर-अक्तूबर 2026)

भारत-दर्शन का सितम्बर-अक्टूबर 2026 अंक आपकी सेवा में सादर भेंट है।

इस अंक में हमने विविध साहित्य और सांस्कृतिक रंगों को प्रमुखता दी है। यह अंक पाठकों के लिए कथा-कहानियों, काव्य, ग़ज़लों, बाल-साहित्य तथा ज्ञानवर्धक आलेखों का एक अनूठा गुलदस्ता प्रस्तुत करता है। इस अंक में हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित और समकालीन रचनाकारों की रचनाएँ शामिल हैं, जो जीवन के विविध पक्षों को उजागर करती हैं।

कथा-कहानियाँ में महाश्वेता देवी की 'क्यों-क्यों लड़की', डॉ धनीराम प्रेम (ब्रिटेन) की 'देश की वेदी पर', मलयज की 'बिना चेहरोंवाली गली', यशपाल की 'महाराजा का इलाज', चन्द्रगुप्त विद्यालंकार की 'हूक', तथा रोहित कुमार 'हैप्पी' की आ अब लौट चलें...,जैसी उत्कृष्ट कहानियाँ प्रकाशित की गई हैं।

लघुकथाओं में  शेख़ सादी की 'उत्तम उपासना', सुदर्शन की 'भारी नहीं, भाई है', अयोध्याप्रसाद गोयलीय की 'इतवार वाले बाबूजी', बलराम अग्रवाल की 'लेखक-प्रकाशक संवाद', पृथ्वीराज अरोड़ा की 'कील', तथा विष्णु प्रभाकर की 'मोहब्बत' पढ़ें।

लोक-कथा में  मुरलीधर जगताप की 'चार मित्र'। सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की शिक्षाप्रद कथा दो घड़े प्रकाशित की गई हैं।

काव्य के अंतर्गत राकेश खंडेलवाल की 'चाहा कितनी बार कहूँ मैं', तथा विनीता तिवारी की 'हिंदी अभियान' रचनाएँ पाठकों को पसंद आएंगी। 

काव्य खंड में कविताओं के अंतर्गत मैथिलीशरण गुप्त की मातृ-मन्दिर, श्रीकृष्ण सरल की आत्म-दर्शन तथा मैं अमर शहीदों का चारण, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की उलहना, दूधनाथ सिंह की एक आँख वाला इतिहास, केदारनाथ सिंह की कविता क्या है, डॉ रामकुमार वर्मा की हिंदी का अर्थ, राकेश खंडेलवाल की चाहा कितनी बार कहूँ मैं, सुभाष मुनेश्वर (न्यूज़ीलैंड) की एक प्रार्थना, डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड (न्यूज़ीलैंड) की ज़िम्मेदारी, आराधना झा श्रीवास्तव की जीवन का राग,  डॉ सुनीता शर्मा (न्यूज़ीलैंड) की मेरा दिल मोम सा, प्रीता व्यास (न्यूज़ीलैंड) की मैं कवि हूँ, तथा विनीता तिवारी की हिंदी अभियान रचनाएँ पाठकों को पसंद आएंगी।

दोहों में संत पलटूदास के दोहे गुरु महिमा इस अंक को और समृद्ध करते हैं।

ग़ज़लों में ज्ञानप्रकाश विवेक की अजीब क़िस्म का अहसास, बशीर बद्र की आँखों में रहा, गिरेन्द्रसिंह भदौरिया 'प्राण' की आग कितनी है..., सुदर्शन फ़ाकिर की आदमी आदमी को क्‍या देगा, संध्या नायर (ऑस्ट्रेलिया) की कलम इतनी घिसो..., शांती स्वरुप मिश्र की खड़ी आँगन में अगर, शुभांगिनी कुमारी चन्द्रिका की ग़ज़ल, निज़ाम-फतेहपुरी की जिंदगी इक सफ़र है, सूर्यभानु गुप्त की जिनके अंदर चिराग..., रेखा राजवंशी (ऑस्ट्रेलिया) की ज़िन्दगी इतनी भी आसान नहीं, ज़फ़रुद्दीन 'ज़फ़र' की दुनिया के दिखावे में, तथा शमशेर बहादुर सिंह की यहाँ कुछ रहा हो पढ़ें।

ग़ज़लों के अतिरिक्त काव्य में उदयभानु हंस की सृजन पर दो हिन्दी रुबाइयां भी इस अंक को समृद्ध करती हैं।

गीतों में अनिता बरार (ऑस्ट्रेलिया) का गीत सुहाना सहाना लगे सम्मिलित किया है।

बाल-साहित्य में द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी की एक हमारी धरती सबकी, श्रीप्रसाद की ऐसे सूरज आता है, डॉ दिविक रमेश की 'बस बातें ही बातें करते', रामेश्वर 'करुण' की बाल-कविता कौन भला, नफे सिंह कादयान की मुन्ने के साथी, अकबर-बीरबल के किस्सों की शृंखला से लकीर छोटी हो गयी, तथा भारत-दर्शन संकलन की शेख चिल्ली की चिट्ठी जैसी रचनाएँ बच्चों के साथ-साथ सभी पाठकों को पसंद आएंगी।

विविध रचनाओं तथा आलेखों में जगन्नाथ प्रसाद चौबे वनमाली का गद्यगीत अभिसारिका, कुमार मनीश की जल बरसाने वाले वृक्ष, रोहित कुमार 'हैप्पी' (न्यूज़ीलैंड) की डॉक्टर धनीराम प्रेम—एक बेजोड़ प्रवासी, दक्षिण प्रशांत के प्रारम्भिक हिंदी शिक्षक/प्रचारक, तथा न्यूज़ीलैंड में हिंदी शिक्षण, डॉ. सुनील जाधव की बंजारा लोकगीतों में भक्ति : एक समीक्षा, भारत-दर्शन की शारदाचरण मित्र, सुभाषिनी लता कुमार (फीजी) की श्रीमती सुक्लेश बली से डॉ. सुभाषिनी कुमार की बातचीत, तथा प्रो. राजेश कुमार की हिंदी में उर्दू शब्दों का इस्तेमाल पढ़ें।

संस्मरण के अंतर्गत डॉ. संध्या सिंह की विस्मृतियों के दौर में अमिट प्रस्तुत है।

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