अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

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जनवरी-फरवरी 2019

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भारत के राष्ट्रपति ने लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल, भोगली बिहू, उत्तरायण और पुष्य पर्व की पूर्व संध्या पर शुभकामनाएं दीं

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल, भोगली बिहू, उत्तरायण और पुष्य पर्व की पूर्व संध्या पर सभी नागरिकों को अपनी शुभकामनाएं दी हैं।

अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि "सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मौसम बदलने लगता है, मैं इस अवसर पर सभी भारतीयों और विदेशों में बसें देशवासियों को लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल, भोगली बिहू, उत्तरायण और पुष्य पर्व के साथ-साथ फसल कटाई के उत्सव पर अपनी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

राष्ट्रपति ने कहा कि ये त्यौहार पूरे भारत में विविध रूपों में किन्तु समानता के साथ मनाए जाते हैं। यह उत्सव हमारे देश के किसानों और अन्य करोड़ों लोगों के अथक परिश्रम और तप की सराहना का भी होता है। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर सभी देशवासियों की समृद्धि, खुशहाली और भ्रातृत्व भावना को और मजबूत बनाने की भी कामना की।

 

'नव वर्ष' सोहनलाल द्विवेदी की कविता, 'नव वर्ष' हरिवंश राय बच्चन की कविता, 'साथी, नया वर्ष आया है' हरिवंश राय बच्चन की कविता, 'नया साल' भवानी प्रसाद मिश्र की कविता, 'नववर्ष' भवानी प्रसाद मिश्र की कविता, 'नया साल आए' दुष्यंत कुमार की कविता, 'नये साल का पृष्ठ' शिवशंकर वशिष्ठ की कविता, 'वर्ष नया' की कविता, 'शुभकामनाएँ' कुमार विकल की कविता, 'नया वर्ष ' डॉ० राणा प्रताप गन्नौरी राणा की रचना, 'काश! नए वर्ष में' हलीम 'आईना' की कविता, 'नववर्ष पर..' अमिता शर्मा की कविता, 'नये बरस में कोई बात नयी 'रोहित कुमार 'हैप्पी' की रचना।

'एक बरस बीत गया' अटल बिहारी वाजपेयी की कविता।

2019 के प्रवेशांक में पढ़िए, जयशंकर प्रसाद की कहानी, 'गुंडा', प्रेमचंद की कहानी, 'मंत्र', वनफूल की कहानी, 'गरीब आदमी', जैनेन्द्र कुमार की, 'जाह्नवी', स्वामी विवेकानंद की, 'पवहारी बाबा' और एन्तॉन चेखव की अनूदित कहानी, 'शर्त'।

नववर्ष पर अनेक रचनाकारों की 'नव-वर्ष कविताओं' के अतिरिक्त दुष्यंत कुमार की, 'काश! मैं भगवान होता', धर्मवीर भारती की रचना, 'पूजा गीत', सत्यनारायण लाल की, 'किसान' कविता पठनीय है।

गीतों में,गयाप्रसाद शुक्ल सनेही का गीत, 'दिन अच्छे आने वाले हैं', नर्मदा प्रसाद खरे का गीत, 'मैं तुम्हारी बांसुरी में स्वर भरूँगा', विनय शुक्ल 'अक्षत' का गीत, 'जब अन्तस में पीड़ा हो, सन्नाटे हों' व श्री गिरिधर गोपाल का 'तुमने मुझको देखा मेरा भाग खिल गया' प्रकाशित किए गए हैं।

आपके अनेक चहेते ग़ज़लकारों की ग़ज़लें हैं, दोहों, हाइकु और भजनों को भी यथोचित स्थान दिया गया है।

इधर हम कुछ समय से देख रहे हैं कि हिन्दी के अनेक प्रकाशन व टीवी चैनल 'भारत-दर्शन' की सामग्री का उपयोग कर रहे हैं। हमें प्रसन्नता है कि हम आपके काम आ रहे हैं। हमारी बहुत-सी सामग्री हमारे अथक-परिश्रम और शोध का परिणाम है यथा आपसे विनम्र विनती है कि सहर्ष सामग्री का उपयोग करें किन्तु सामग्री के साथ 'भारत-दर्शन' का उल्लेख अवश्य करें। इससे हमें बल मिलेगा और प्रोत्साहन भी। 

 

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