न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित 'भारत-दर्शन' मे आपका स्वागत है। यहाँ आप साहित्य संकलन और भारत-दर्शन द्वै-मासिक पत्रिका के अतिरिक्त हिंदी के अनेक संसाधनों से लाभान्वित हो सकते हैं।
हार्दिक आभार।
भारत-दर्शन का जनवरी-फरवरी 2026 अंक आपकी सेवा में सादर भेंट है।
इस अंक में हमने नव वर्ष, लोहड़ी-मकर संक्रांति तथा हिंदी भाषा एवं साहित्य को प्रमुखता दी है। विशेष रूप से न्यूज़ीलैंड से नव वर्ष की शुरुआत तथा लोहड़ी के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर केंद्रित रचनाएँ शामिल की गई हैं।
कहानी खंड में गिरीश पंकज की कहानी 'पल की खबर नहीं', अरुणा सब्बरवाल की ‘ललक’, बालकृष्ण शर्मा नवीन की ‘गोई जीजी’, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की ‘गूँगी’, कमलेश्वर की ‘चप्पल’ तथा अज्ञेय की ‘शत्रु’ जैसी कालजयी कहानियाँ प्रकाशित की गई हैं।
लघुकथा के अंतर्गत डॉ. रामनिवास मानव की ‘पत्नी का भविष्य’, बलराम अग्रवाल की ‘दरख्त’ तथा रामकुमार आत्रेय की ‘फुरसत’ पाठकों को विशेष रूप से आकर्षित करेंगी।
लोक-कथा के अंतर्गत हरियाणा की लोक-कथा ‘धैर्यवान पुरुष’ प्रकाशित है। इसके अलावा रोहित कुमार 'हैप्पी' की ‘मकर संक्रांति’, ‘लोहड़ी लोक-गीत’ तथा ‘लोहड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ’ जैसे लेख भी शामिल हैं।
काव्य खंड में रामधारी सिंह दिनकर की ‘ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं’ एवं ‘जनतंत्र का जन्म’, अदम गोंडवी की ग़ज़ल ‘वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग’, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी की ‘ज़िंदगी मुझको...’, निज़ाम फतेहपुरी की ग़ज़ल 'शैतान धोका दे रहा', दिविक रमेश की ‘जय जय भारत देश’, प्रेम जनमेजय की ‘आपात्काल में अकाल’, विजय कुमार सिंघल की ‘इसको ख़ुदा बनाकर’, सुब्रह्मण्य भारती की ‘सब शत्रुभाव मिट जाएँगे’, गोपालप्रसाद व्यास की ‘भई, भाषण दो ! भई, भाषण दो !!’, अजातशत्रु की ‘कविता ज़िन्दाबाद हमारी कविता ज़िन्दाबाद’, अरविंद पथिक का गीत ‘गीत, गज़ल, कविताएं, कहानी रचते चले गये’ तरिंदर कौर की तीन कविताएं, सुशील शर्मा की कविता 'नया वर्ष, नए संकल्प', डॉ. सीमा अग्निहोत्री चड्ढा 'अदिति' की कविता 'गाथा' तथा प्रोमिला दुआ की दो रचनाएँ प्रमुख हैं।
विविध खंड में प्रो. राजेश कुमार का व्यंग्य ‘दोगलों का इलाज’, रोहित कुमार 'हैप्पी' के आलेख ‘लोहड़ी - लुप्त होते अर्थ’ एवं ‘न्यूजीलैंड : जहाँ सबसे पहले मनता है नया-वर्ष’, रामस्वरूप दीक्षित का व्यंग्य ‘समीक्षक की दुविधा के बीच कवि का फोन’, डॉ. स्वाति चौधरी की पुस्तक समीक्षा ‘तुम कौन-सी पाटी पढ़े हो लला’ तथा रोहित कुमार 'हैप्पी' का आलेख ‘हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस: क्या है अंतर?’ जैसी विचारपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं।
बाल-साहित्य खंड इस बार विशेष रूप से समृद्ध है। इसमें मुंशी प्रेमचंद की बाल कहानी ‘गुब्बारे पर चीता’, अकबर-बीरबल का किस्सा ‘अधर महल’ तथा डॉ. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी ‘राणा’ की बाल-कविता ‘हिन्दी ही अपने देश का गौरव है मान है’ सहित अन्य रोचक बाल रचनाएँ सम्मिलित हैं।
पंचतंत्र की कथा 'उल्लू और कौवे के बैर का कारण' और शेखचिल्ली का नया कारनामा 'गिलास के पेंदे का तेल' बच्चों के अतिरिक्त अन्य पाठकों को भी गुदगुदाएंगे।
आशा है पाठकों का स्नेह मिलता रहेगा। आप भी भारत-दर्शन में प्रकाशनार्थ अपनी रचनाएं भेजें।
पिछला अंक 'नवंबर-दिसंबर 2025' यहाँ पढ़ें।

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