अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

Find Us On:

English Hindi
Loading
छवि नहीं बनती (काव्य)  Click To download this content
   
Author:सपना सिंह ( सोनश्री )

निराला पर सपना सिंह (सोनश्री) की कविता

 

निराला जी, निराले थे

इसलिए तो,

सबको, भाये थें

आपके,शब्दों में,

जादू था ऐसा ,

कि,

आज भी,

गूंजते हैं वहीं,

जेहन में,

बार बार,

कर्नाकाश के,

 अक्षय पटल पर ।

अभाव में,

भाव,

आये थे कैसे ?

आज तो,

भाव में भाव,

आता नहीं

सोचती हूँ ,

कहाँ से,

उमड़ेगी कविता,

जिसमे,

झलकेगी,

छवि आपकी

क्या कहूँ,

शब्द,

नहीं बनते,

भाग, जाते हैं,

आपके,

नाम से, शब्दों के,

चमत्कार से

निराला जी, निराले थे,

इसलिए तो,

सबको,

भाये थे आप


   - सपना सिंह ( सोनश्री )

 

#

Poem by Sapana Singh


Previous Page  | Index Page  |    Next Page

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश