मैं महाराष्ट्री हूँ, परंतु हिंदी के विषय में मुझे उतना ही अभिमान है जितना किसी हिंदी भाषी को हो सकता है। - माधवराव सप्रे।

Find Us On:

English Hindi
Loading

रवि

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 मैथिलीशरण गुप्त | Mathilishran Gupt

अस्त हो गया है तप-तप कर प्राची, वह रवि तेरा।
विश्व बिलखता है जप-जपकर, कहाँ गया रवि मेरा?

- मैथिलीशरण गुप्त
  [रबीन्द्रनाथ टैगोर को समर्पित मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियाँ] 

Back

 

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.