अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

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दो क्षणिकाएं

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

कवि 

तुम्हारी कलम में
वो 'पीर' नहीं। 
तुमने शब्द गढ़े,
जीये नहीं।
तुम कवि तो हुए
कबीर नहीं! 

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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स्पष्टीकरण 

हाँ, मैंने कहा था--
अच्छे दिन आएँगे। 
कब कहा था, लेकिन --
तुम्हारे? 

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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