हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

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दो क्षणिकाएं

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी'

कवि 

तुम्हारी कलम में
वो 'पीर' नहीं। 
तुमने शब्द गढ़े,
जीये नहीं।
तुम कवि तो हुए
कबीर नहीं! 

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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सपष्टीकरण 

हाँ, मैंने कहा था--
अच्छे दिन आएँगे। 
कब कहा था, लेकिन --
तुम्हारे? 

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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