कविता मानवता की उच्चतम अनुभूति की अभिव्यक्ति है। - हजारी प्रसाद द्विवेदी।

Find Us On:

English Hindi
Loading
बड़ी नाज़ुक है डोरी | ग़ज़ल  (काव्य) 
   
Author:डा. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

बड़ी नाज़ुक है डोरी साँस की यह 
कहीं टूटी तो बाकी क्या रहेगा

रखो तुम बंद चाहे अपनी घड़ियां
समय तो रात दिन चलता रहेगा

न जाने क्यों हमें यह लग रहा है
हमारे बाद सन्नाटा रहेगा

वृथा है आज, कल की फिक्र 'राणा'
जो कुछ होना है वह होता रहेगा

-डॉ राणा प्रताप सिंह 'राणा' गन्नौरी 

 

Previous Page  | Index Page  |    Next Page

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश