परमात्मा से प्रार्थना है कि हिंदी का मार्ग निष्कंटक करें। - हरगोविंद सिंह।

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ढोल, गंवार... (काव्य)

Author: सुरेंद्र शर्मा

मैंने अपनी पत्नी से कहा --
"संत महात्मा कह गए हैं--
ढोल, गंवार, शुद्र, पशु और नारी
ये सब ताड़न के अधिकारी!"
[इन सभी को पीटना चाहिए!]

इसका अर्थ समझती हो या समझाएं?
पत्नी बोली-
"हे स्वामी, इसका मतलब तो बिलकुल साफ़ है
इसमें एक जगह मैं हूँ और चार जगह आप हैं।"

- सुरेंद्र शर्मा

 

 

 

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