राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

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काश! नए वर्ष में (काव्य)

Author: हलीम 'आईना'

काश! नए वर्ष में
ऐसा हो जाए।
कुर्सी हथियाने के बाद भी
हर एक सत्ताधारी
चुनाव पूर्व वाली
विनम्रता दिखलाए ।

काश! नए वर्ष में
ऐसा से जाए,
किसी ग़रीब के हिस्से का
कौर हड़पने
कोई तौंदिया न आए ।

काश! नए वर्ष में
ऐसा से जाए,
कोई भी ट्यूशनख़ोर द्रोणाचार्य
अपने चहेते अर्जुनों की ख़ातिर
किसी एकलव्य का अँगूठा न कटवाए ।

काश! नए वर्ष में
ऐसा से जाए ।

- हलीम 'आईना'

 

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