अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

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जो दीप बुझ गए हैं (काव्य)

Author: दुष्यंत कुमार

जो दीप बुझ गए हैं
उनका दु:ख सहना क्या,
जो दीप, जलाओगे तुम
उनका कहना क्या,

सुधि की हथेलियों पर
चिंतित माथा न धरो,
जो दीप जल रहे हैं
अब उनकी बात करो ।

-दुष्यंत कुमार

 

 

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