समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

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आज़ाद के अमर-वचन (विविध)

Author: भारत-दर्शन संकलन

"जिस राष्ट्र ने चरित्र खोया उसने सब कुछ खोया।"

-चंद्रशेखर आज़ाद

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"मैं जीवन की अंतिम सांस तक देश के लिए शत्रु से लड़ता रहूंगा।"

-चंद्रशेखर आज़ाद

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"गिरफ़्तार होकर अदालत में हाथ बांध बंदरिया का नाच मुझे नहीं नाचना है। आठ गोली पिस्तौल में हैं और आठ का दूसरा मैगजीन है। पन्द्रह दुश्मन पर चलाऊंगा और सोलहवीं यहाँ!" और आज़ाद अपनी पिस्तौल की नली अपनी कनपटी पर छुआ देते।

-चंद्रशेखर आज़ाद

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"आज़ाद की कलाई में हथकड़ी लगाना बिल्कुल असंभव है। एक बार सरकार लगा चुकी, अब तो शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे, लेकिन जीवित रहते पुलिस बन्दी नहीं बना सकती।"

- चंद्रशेखर आज़ाद

[आज़ाद केवल एक बार बचपन में पुलिस के हाथों पकड़े गए थे तभी उन्होंने प्रण किया था कि वे कभी पुलिस के हाथ नहीं आएंगे।]

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"जब तक यह बमतुल बुख़ारा (आज़ाद अपने माउजर पिस्तौल को इसी नाम से पुकारते थे) मेरे पास है किसने माँ का दूध पिया है जो मुझे जीवित पकड़ ले जाए।"

- चन्द्रशेखर आज़ाद

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