परमात्मा से प्रार्थना है कि हिंदी का मार्ग निष्कंटक करें। - हरगोविंद सिंह।

Find Us On:

English Hindi
Loading
मात | लघु-कथा (कथा-कहानी) 
Click to print this content  
Author:अमिता शर्मा

 

"इतनी उखड़ी हुई क्यों हो?"


उसका चेहरा इतना उदास कभी न था।


उसका सारा आत्म-विश्वास, उसका दर्प-अभिमान सब नदारद था।


"....Feeling embarrassed, yaar....."


उसका स्वर बहुत बुझा हुआ था।


"मगर क्यों? अभी तो online थी!"


"तभी तो---! मेरा तो अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया। मुझसे तो मेरी पहचान ही छीन ली है उसने---"


"कुछ बताओगी भी या पहेलियां ही बुझाती रहोगी!"


"देख लो, खुद ही देख लो। कैसे कमेंट्स मिले हैं मुझे।"


"वाह! बिल्कुल आदमी की तरह रंग बदलती हो --"


"देख लिया न!"  कहते-कहते गिरगिट रो पड़ी।


- अमिता शर्मा, भारत।

 

Previous Page  |  Index Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश