कैसे निज सोये भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। - हरिऔध।

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प्रेमचंद की बाल कहानियां  (बाल-साहित्य )    Print  
Author:मुंशी प्रेमचंद | Munshi Premchand
 

प्रेमचंद ने बाल साहित्य भी रचा है। 1948 में सरस्वती प्रेस से श्रीपतराय (प्रेमचन्द के पुत्र) ने 'जंगल की कहानियां' नामक पुस्तक प्रकाशित करवाई थी जिसमें प्रेमचंद की 12 बाल कहानियां थीं। इसके अतिरिक्त भी प्रेमचंद ने बच्चों के लिए एक लम्बी कहानी 'कुत्ते की कहानी' व 'कलम, तलवार और त्याग' जिसमें महापुरुषों के जीवन की कथाएं लिखी हैं। यहाँ उन्हीं में से कुछ को संकलित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रेमचंद का बाल-साहित्य इस प्रकार हैं : माहात्मा शेख सादी, राम चर्चा, जगंल की कहानियाँ, कुत्ते की कहानी, दुर्गादास और कलम, तलवार और त्याग (दो भाग)।

जंगल की कहानियां

शेर और लड़का
बनमानुष की दर्दनाक कहानी
दक्षिण अफ्रीका में शेर का शिकार
गुब्बारे का चीता
पागल हाथी
साँप की मणि
बनमानुष का खानसामा
मिट्ठू
पालतू भालू
बाघ की खाल
मगर का शिकार
जुड़वा भाई

 

कुत्ते की कहानी

कलम, तलवार और त्याग

 

 

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