देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

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गति का कुसूर (काव्य)    Print  
Author:अशोक चक्रधर | Ashok Chakradhar
 

क्या होता है कार में
पास की चीज़ें
पीछे दौड़ जाती हैं
तेज़ रफ़्तार में!

और यह शायद
गति का ही कुसूर है,
कि वही चीज
देर तक
साथ रहती है
जो जितनी दूर है ।

-अशोक चक्रधर

[सोची-समझी, प्रतिभा प्रतिष्ठान, नई दिल्ली]

 

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