राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

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हिंदी भजन
हिंदी भजन-Hindi Bhajan

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यहीं धरा रह जाए सब | भजन - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

प्राण पंछी उड़ जाए जब, यहीं धरा रह जाए सब
यही सिकंदर मिला धूल में
और बुद्ध को निर्वाण मिला।
प्राण पंछी उड़ जाए जब, यहीं धरा रह जाए सब।।
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उठ जाग मुसाफिर भोर भई - वंशीधर शुक्ल

उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो तू सोवत है
जो जागत है सो पावत है, जो सोवत है वो खोवत है
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