भाषा ही राष्ट्र का जीवन है। - पुरुषोत्तमदास टंडन।

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संस्मरण
संस्मरण - Reminiscence

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दीक्षा | कहानी  - स्वामी विवेकानंद

एक व्यक्ति बहुत दुष्ट था। एक दिन जब वह दुष्कर्म करते हुए पकड़ा गया तो दंडस्वरूप उसकी नाक काट कर उसे भगा दिया गया। अब वह व्यक्ति अपने नक-कटे मुँह को लेकर लोगों के सामने कैसे जाता! यह मुँह किसी को दिखाने के योग्य कहाँ रह गया था ? उसका मन अपार दु:ख से भर-सा गया था। अंत में बहुत सोच विचार करने के पश्चात् उसने निश्चय किया कि जंगल ही उसके लिए उपयुक्त स्थान है। वह जंगल में वास करने लगा।
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