राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

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हास्य काव्य
भारतीय काव्य में रसों की संख्या नौ ही मानी गई है जिनमें से हास्य रस (Hasya Ras) प्रमुख रस है जैसे जिह्वा के आस्वाद के छह रस प्रसिद्ध हैं उसी प्रकार हृदय के आस्वाद के नौ रस प्रसिद्ध हैं - श्रृंगार रस (रति भाव), हास्य रस (हास), करुण रस (शोक), रौद्र रस (क्रोध), वीर रस (उत्साह), भयानक रस (भय), वीभत्स रस (घृणा, जुगुप्सा), अद्भुत रस (आश्चर्य), शांत रस (निर्वेद)।

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हिन्दी-हत्या - अरुण जैमिनी

सरकारी कार्यालय में
नौकरी मांगने पहुँचा
तो अधिकारी ने पूछा-
"क्या किया है?"
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आदमी से अच्छा हूँ ....! - हलीम 'आईना'

भेड़िए के चंगुल में फंसे
मेमने  ने कहा--
'मुझ मासूम को खाने वाले
हिम्मत है तो
आदमी को खा!'
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बेधड़क दोहावली  - बेधड़क

गुस्सा ऐसा कीजिए, जिससे होय कमाल ।
जामुन का मुखड़ा तुरत बने टमाटर लाल।।
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