हिंदी के पुराने साहित्य का पुनरुद्धार प्रत्येक साहित्यिक का पुनीत कर्तव्य है। - पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल।

Find Us On:

English Hindi
Loading

चेहरे से दिल की बात | ग़ज़ल

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 अंजुम रहबर

चेहरे से दिल की बात छलकती ज़रूर है,
चांदी हो चाहे बर्क चमकती ज़रूर है।

दिल तो कई दिनों से कहीं खो गया मगर,
पहलू में कोई चीज़ धड़कती ज़रूर है।

कमज़र्फ कह रहे हो मगर ये भी जान लो,
हो आँख या शराब छलकती ज़रूर है।

ये और बात है कोई महसूस कर न पाये,
हर दिल में कोई आग भडकती जरूर है।

छुपती कभी नहीं है मोहब्बत छुपाये से,
चूड़ी हो हाथ में तो खनकती ज़रूर है।

हम झुक के मिल रहे हैं तो कमजोर मत समझ,
फलदार शाख हो तो लचकती ज़रूर है।

अल्फाज़ फूल ही नहीं कांटे भी हैं मगर,
अंजुम कहे ग़ज़ल तो महकती ज़रूर है।

                           -अंजुम रहबर

 

Back

 

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.