जो साहित्य केवल स्वप्नलोक की ओर ले जाये, वास्तविक जीवन को उपकृत करने में असमर्थ हो, वह नितांत महत्वहीन है। - (डॉ.) काशीप्रसाद जायसवाल।

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हाइकु

हाइकु

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सुनीता शर्मा के हाइकु - डॉ सुनीता शर्मा | न्यूज़ीलैंड

भाव ही भाव
आजकल आ-भा-व
है कहीं कहां

 
कोरोना हाइकु  - सत्या शर्मा 'कीर्ति'

कोरोना मार
अन्तर्भेदी चीत्कार
सभी लाचार