जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।
ऑस्ट्रेलिया में कुंवर बेचैन काव्य संध्या (विविध)  Click to print this content  
Author:रेखा राजवंशी

ऑस्ट्रेलिया। इंडियन लिटरेरी एंड आर्ट सोसाइटी ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया ने सिडनी में डा० कुंवर बेचैन के सम्मान में छह जून को एक कवि सम्मलेन का आयोजन किया। डा० बेचैन भारत के सुप्रसिद्ध कवि हैं जिनकी 32 से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

Kunwar Bechain in Australiaकार्यक्रम का आरम्भ संस्था की संस्थापिका रेखा राजवंशी ने किया। उन्होंने बेचैन जी का स्वागत करते हुए कहा, "हमें अपनी भाषाओँ और साहित्य को ऑस्ट्रेलिया में बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए"

सांस्कृतिक परंपरानुसार दीप प्रज्ज्वलित करके समारोह का शुभारंभ हुआ। तत्पश्चात ऋचा श्रीवास्तव ने बेचैन जी का लोकप्रिय गीत 'बदरी बाबुल के देस जइयो, जइयो बरसियो कहियो, हम हैं बाबुल तेरी बिटिया की अँखियाँ' के गायन से सबका मन मोह लिया।

कार्यक्रम में सिडनी के शायरों ने भी भाग लिया जिनमें सिडनी के वरिष्ठ उर्दू शायर आरिफ सादिक और शायरा फरहत इकबाल मुख्य थे। हिंदी कवियों में भावना कुंवर, रेखा राजवंशी, राजीव कपूर और युवा कवि गौरव कपूर ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। डा० बेचैन के लोकप्रिय ग़ज़ल और गीत सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

'सबकी बात न मन कर', 'किसी भी काम को करने की चाहें पहले आती हैं', 'अगर बच्चे को गोदी लो तो बहन पहले आती हैं।'

डा० बेचैन ने 'जीवन में पाजिटिविटी' की बात की और अपनी संघर्षपूर्ण जीवन के बारे में भी बताया।

सिडनी के शास्त्रीय ग़ज़ल गायकों मुरली वेंकटरमन, अपर्णा नगश्यायन, सुमति कृष्णन और अरुण नंदा ने ग़ज़ल गायन करके श्रोताओं का मन मोह लिया। वस्तुतः यह शाम हिंदी ग़ज़ल और शायरी को समर्पित थी।

काव्य पाठ के अंत में श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से डा० कुंवर बेचैन का सम्मान किया। सिडनी काव्य प्रेमियों के लिए शायरी की यह शाम एक यादगार शाम बन गई।

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समारोह के अन्य छायाचित्रों के लिए यहाँ चित्र-दीर्घा देखें

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