जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता। - देशरत्न डॉ. राजेन्द्रप्रसाद।
बारिश की मस्ती | बाल कविता (बाल-साहित्य )  Click to print this content  
Author:अमृता गोस्वामी

रिमझिम रिमझिम बारिश आई,
काली घटा फिर है छाई।
सड़कों पर बह उठा पानी,
कागज़ की है नाव चलानी

नुन्नू-मुन्नू-चुन्नू आए,
रंग-बिरंगे छाते लाए।
कहीं छप-छप, कहीं टप-टप,
लगती कितनी अच्छी गपशप।

रिमझिम बारिश की फौहारें
मन को भातीं खूब बौछारें,
बारिश की यह मस्ती है,
हो चाहे कल छुट्टी है।

- अमृता गोस्वामी, जयपुर

ई-मेल: amrita.del@gmail.com

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