जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।
इश्तिहार | लघु-कथा (कथा-कहानी)  Click to print this content  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

"मेरा बहुत सा क़ीमती सामान जिसमें शांति, सद्‌भाव, राष्ट्र-प्रेम, ईमानदारी, सदाचार आदि शामिल हैं - कहीं गुम गया है। जिस किसी सज्जन को यह सामान मिले, कृपया मुझ तक पहुँचाने का कष्ट करे।

आपका अपना,
भारत बनाम हिंदोस्तान "

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- रोहित कुमार 'हैप्पी'
  संपादक, भारत-दर्शन, न्यूज़ीलैंड

Posted By kuldeep Kumar Suri   on Tuesday, 11-Nov-2014-16:03
 
हार्ट टचिंग .
 
 
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