हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

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Archive of जुलाई-अगस्त 2018 Issue

जुलाई-अगस्त 2018

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इस अंक की कथा-कहानियों में गुलेरी की 'हीरे का हीरा', प्रेमचंद की 'महातीर्थ', सुब्रह्मण्य भारती की 'अर्जुन का संदेह', लीलावती मुंशी की 'जीवन संध्या' व सुशांत सुप्रिय की 'भूकंप' प्रकाशित की गई हैं। इसके अतिरिक्त लघु-कथाएं, लोक-कथाएं, संस्मरण प्रकाशित किए गए हैं।

लोक-कथाओं में भारतीय लोक-कथाओं के अतिरिक्त इस बार न्यूज़ीलैंडऑस्ट्रेलिया की लोक-कथाएं प्रकाशित की गई हैं।

इस बार साक्षात्कार के अंतर्गत हम आपकी मुलाकात 'मदारीपुर जंक्शन' के उपन्यासकार 'बालेन्दु द्विवेदी' व न्यूज़ीलैंड लोक-कथाओं की लेखिका 'प्रीता व्यास' से करवा रहे हैं।

काव्य में गीत, ग़ज़ल, कविता, दोहे, भजन व हास्य कविताएं सम्मिलित की गई हैं।
बाल-साहित्य के अंतर्गत शेखचिल्ली की कहानी, 'ख्याली जलबी', अरविंद की सीख भरी बाल-कथा, 'बेईमान' और सुभद्राकुमारी चौहान की 'हींगवाला' बच्चों को रोचक लगेंगी। बालस्वरूप राही व निरंकार देव सेवक के बाल-गीत पढ़कर बच्चे आनंदित होंगे।

आलेखों में इलाश्री का आलेख 'माँ का संवाद - लोरी', गोवर्धन यादव का 'यात्रा अमरनाथ की' व '1857 के आन्दोलन में उत्तर प्रदेश का योगदान' पठनीय है।

 

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