कैसे निज सोये भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। - हरिऔध।

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लघु-कथाएं

लघु-कथा, 'गागर में सागर' भर देने वाली विधा है। लघुकथा एक साथ लघु भी है, और कथा भी। यह न लघुता को छोड़ सकती है, न कथा को ही।

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परम्परा - रोहित कुमार 'हैप्पी'

महाविद्यालय का एक अध्ययन-कक्ष।

 
गरीबी रेखा का कार्ड - शिवम् खरे

सुखी काछी ग़रीबी रेखा का कार्ड बनवाने के लिए आज पाँचवी बार सरकारी बाबू के पास आया है ।

 
जानवरीयत - डॉ. चंद्रेश कुमार छ्तलानी

वृद्धाश्रम के दरवाज़े से बाहर निकलते ही उसे किसी कमी का अहसास हुआ, उसने दोनों हाथों से अपने चेहरे को टटोला और फिर पीछे पलट कर खोजी आँखों से वृद्धाश्रम के अंदर पड़ताल करने लगा। उसकी यह दशा देख उसकी पत्नी ने माथे पर लकीरें डालते हुए पूछा, "क्या हुआ?"

 
बेटी - केतन कोकिल

आक्रोश घेर रहा था दीवारों में...परन्तु दीवारे इतनी मज़बूत थी...कभी निकल ना पाओ...कभी रह ना पाओ!!
दर्द भी जेब में खनक रहा था, सर और शरीर दोनों टूटने को तैयार थे ...!

 

 

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