राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

Find Us On:

English Hindi
Loading

लघुकथाएं

लघु-कथा, *गागर में सागर* भर देने वाली विधा है। लघुकथा एक साथ लघु भी है, और कथा भी। यह न लघुता को छोड़ सकती है, न कथा को ही। संकलित लघुकथाएं पढ़िए -हिंदी लघुकथाएँप्रेमचंद की लघु-कथाएं भी पढ़ें।

Article Under This Catagory

हिंदी की पहली लघुकथा - रोहित कुमार 'हैप्पी'

क्या आप जानते हैं कि हिंदी की पहली लघुकथा कौनसी है?

 
लेनदेन - खलील जिब्रान

एक आदमी था। उसके पास सुइयों का इतना भण्डार था कि एक घाटी उनसे भर जाए।

 
देशभक्ति का पारितोषिक - प्रवीण जैन

चोर एक घर में घुसा। उस समय वहाँ टेलीविज़न चल रहा था। टेलीविज़न पर राष्ट्रीय गान आरंभ हो गया। चोर सावधान की मुद्रा में वहीं सावधान खड़ा हो गया। गृहस्वामी ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। न्यायाधीश महोदय ने देशभक्ति के पारितोषिक स्वरूप चोर को इज्जत सहित बरी कर दिया और गृहस्वामी को राष्ट्रीय गान का अपमान करने पर सज़ा सुना दी।

 
खिचड़ी भाषा - भारत-दर्शन संकलन

एक बार एक विद्यार्थी ने पंडित नेहरू से 'आटोग्राफ ' मांगा । पंडित जी ने अंग्रेजी में हस्ताक्षर करके उसे पुस्तिका लौटा दी । फिर विद्यार्थी ने पुस्तिका पर एक शुभकामना संदेश लिखने के लिए प्रार्थना की तो चाचा नेहरू ने वह भी पूरीकर दी ।

 
आदमी कहीं का - रोहित कुमार ‘हैप्पी'

Adami Kahi Ka

 
मुट्ठी - राजीव वाधवा

बहुत पुरानी बात है। किसी देश में एक सूफी फ़क़ीर रहता था। वह बहुत प्रसिद्ध था। लोग दूर-दूर से उसके पास अपनी समस्याएं लेकर आते थे। जो फ़क़ीर कह देता, वह भविष्य में सच घटित हो जाता था।

 
माँ ने कहा था - नरेंद्रकुमार गौड़

कमला ने बाजार से रिक्शा लिया और घर की तरफ़ चल पड़ी। रिक्शा एक 18-20 साल का लड़का खींच रहा था। कमला अपनी आदत के अनुसार लड़के से बातें करने लगी।

 

 

सब्स्क्रिप्शन

Captcha Code

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश