राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

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संस्मरण

संस्मरण - Reminiscence

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गांधी का हिंदी प्रेम - भारत-दर्शन संकलन | Collections

महात्मा गांधी की मातृभाषा यद्यपि गुजराती थी तथापि वे भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम में जनसंपर्क हेतु हिन्दी को ही सर्वाधिक उपयुक्त भाषा मानते थे।

 
माली की सीख - भारत-दर्शन संकलन | Collections

छह-सात वर्ष का एक बालक अपने साथियों के साथ एक बगीचे में फूल तोड़ने के लिए गया। तभी बगीचे का माली आ पहुँचा। अन्य साथी भागने में सफल हो गए, लेकिन सबसे छोटा और कमज़ोर होने के कारण एक बालक भाग न पाया। माली ने उसे धर दबोचा।

 
देश के लाल - लाल बहादुर शास्त्री - भारत-दर्शन संकलन | Collections

बात उन दिनों की है जब लालबहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री थे व केरल में सूखा पड़ा हुआ था। चावल की खेती पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। लोग चावल के दाने को तरसने लगे थे। चूंकि केरलवासियों का मुख्य भोजन चावल ही है इसलिए राज्य सरकार चिंतित थी कि केरल निवासी अपनी दिनचर्या कैसे करेंगे!

शास्त्री जी केरल की समस्या जानकर बहुत व्यथित हुए। उन्होंने केरल सरकार को आश्वासन दिया कि प्रदेश के लिए चावल का उचित प्रबंध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेरा संकल्प है कि हर केरलवासी को चावल मिलेगा। बिना चावल के एक भी भाई-बहन भूखा नहीं रहेगा। केरल की जनता को चावल के लिए त्राहि-त्राहि करते देखकर उन्होंने अधिकारियों को चावल की कमी पूरी करने के आदेश दिए। देश के अन्य क्षेत्रों से चावल खरीदकर केरल भेजा जाने लगा।

ऐसे में अन्य प्रदेशों में चावल की कमी होनी स्वाभाविक थी। शास्त्री जी ने रोटी खा सकने वाले लोगों से अनुरोध किया कि वे चावल का प्रयोग कम से कम करें और जो लोग स्वाद के लिए प्रतिदिन चावल का प्रयोग करते हैं, वे भी इसका प्रयोग अनिवार्य होने पर ही करें। उन्होंने अपने घर में भी निर्देश दिए थे कि जब तक केरल में चावल की कमी पूरी नहीं हो जाती तब तक उनके घर में चावल नहीं पकाए जाएं। यह आदेश सुनकर शास्त्रीजी के बच्चे दुखी हुए क्योंकि चावल उन्हें भी प्रिय थे लेकिन शास्त्री जी के आदेश का पालन किया गया।

प्रधानमंत्री निवास में तब तक चावल नहीं पकाए गए जब तक कि केरल की स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पा लिया गया। केरल की सरकार व निवासियों के सहित संपूर्ण भारत ने शास्त्री जी की कार्यशैली के प्रति नतमस्तक हो गया कि  शास्त्री जी ने केरल की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझकर प्रधानमंत्री निवास तक में चावल बनने पर रोक लगा दी। 

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[ भारत-दर्शन संकलन ]

 
शास्त्री जी की खरीदारी - भारत-दर्शन संकलन | Collections

एक बार पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री एक कपड़े की एक दुकान में साड़ियाँ खरीदने गए। दुकान का मालिक शास्त्री जी को देख प्रसन्न हो गया। उसने उनके आने को अपना सौभाग्य मान, उनकी आव-भगत करनी चाही।

 
देश के लाल - लाल बहादुर शास्त्री - भारत-दर्शन संकलन | Collections

एक छोटा बालक अपने साधियों के साथ गंगा नदी के पार मेला देखने गया। शाम को वापस लौटते समय जब सभी दोस्त नदी किनारे जाने लगे तो उस बालक को आभास हुआ कि उसके पास नाव के किराये के लिए पैसे नहीं हैं। उसने अपने साथियों से कहा कि वह थोड़ी देर और मेला देखेगा और बाद में आएगा। स्वाभिमानी बालक को किसी से नाव का किराया मांगना स्वीकार्य न था।

 
शास्त्रीजी - कमलाप्रसाद चौरसिया | कविता - भारत-दर्शन संकलन | Collections

पैदा हुआ उसी दिन,
जिस दिन बापू ने था जन्म लिया
भारत-पाक युद्ध में जिसने
तोड़ दिया दुनिया का भ्रम।

 
दो अक्टूबर - रत्न चंद 'रत्नेश' | कविता - भारत-दर्शन संकलन | Collections

लाल बहादुर, महात्मा गांधी
लेकर आए ऐसी आंधी
कायाकल्प हुआ देश का
जन-जन में चेतना जगा दी।

 
लाल बहादुर शास्त्री -राणा प्रताप सिंह गन्नौरी | कविता - भारत-दर्शन संकलन | Collections

लालों में वह लाल बहादुर,
भारत माता का वह प्यारा।
कष्ट अनेकों सहकर जिसने,
निज जीवन का रूप संवारा।

 

 

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