किसी साहित्य की नकल पर कोई साहित्य तैयार नहीं होता। - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'।

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संस्मरण

संस्मरण - Reminiscence

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कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर और मुंशी प्रेमचंद  - मुंशी प्रेमचंद | Munshi Premchand

एक बार कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' मुंशी प्रेमचंद से पूछ बैठे, "मुंशीजी आप कैसे कागज़ पर और कैसे 'पेन' से लिखते हैं?"

 
वह अनोखा भाई  - भारत-दर्शन संकलन

हिंदी कवयित्री, 'महादेवी वर्मा' व 'निराला' का भाई-बहन का स्नेह भी सर्वविदित है। निराला महादेवी के मुँहबोले भाई थे व रक्षाबंधन कभी न भूलते थे।

 

 

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