जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता। - देशरत्न डॉ. राजेन्द्रप्रसाद।

आचार्य चंद्रबली पाण्डेय

आचार्य चंद्रबली पाण्डेय (25 अप्रैल, 1904 - 24 जनवरी, 1958) ने अपना पूरा जीवन अध्ययन और हिंदी प्रचार में लगा दिया। आप हिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू, फ़ारसी, अरबी तथा प्राकृत भाषाओं के ज्ञाता थे।

चंद्रबली का जन्म 25 अप्रैल, 1904 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के एक गाँव में हुआ था। चंद्रबली ने हिन्दी की उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राप्त की। आचार्यरामचन्द्र शुक्ल के आप प्रिय शिष्य थे।

विश्वविद्यालय की परिधि से बाहर रहकर हिन्दी में शोध कार्य करने वालों में आपका प्रमुख स्थान है। आपने आजीवन अविवाहित रहकर हिन्दी की सेवा की। अपनी व्यक्तिगत सुख-सुविधा के लिए आचार्य चंद्रबली पाण्डेय ने कभी चेष्टा नहीं की। आचार्य चंद्रबली पाण्डेय द्वारा रचित छोटे-बड़े कुल ग्रन्थों की संख्या लगभग 34 है।

कृतियाँ 
उर्दू का रहस्य, तसव्वुफ़ अथवा सूफ़ीमत, बिहार में हिंदुस्तानी, भाषा का प्रश्न, राष्ट्रभाषा पर विचार, मुसलमान, कालिदास, मुगल बादशाहों की हिंदी, तुलसी की जीवन-भूमि, हिन्दी कवि चर्चा, शूद्रक।

निधन 
24 जनवरी, 1958 को आपका निधन हो गया।

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