इस विशाल प्रदेश के हर भाग में शिक्षित-अशिक्षित, नागरिक और ग्रामीण सभी हिंदी को समझते हैं। - राहुल सांकृत्यायन।

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दोहे

 
 
दोहा मात्रिक अर्द्धसम छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण में 13 तथा दूसरे और चौथे चरण में 11 मात्राएं होती हैं। इस प्रकार प्रत्येक दल में 24 मात्राएं होती हैं। दूसरे और चौथे चरण के अंत में लघु होना आवश्यक है। दोहा सर्वप्रिय छंद है।

कबीर, रहीम, बिहारी, उदयभानु हंस, डा मानव के दोहों का संकलन।

 
Literature Under This Category
 
कबीर दोहे -2  - कबीरदास | Kabirdas
(21)
लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट ।
पाछे फिरे पछताओगे, प्राण जाहिं जब छूट ॥

 
रहीम के दोहे  - रहीम
(1)

 
रहीम के दोहे - 2  - रहीम
(21)

 
राजगोपाल सिंह | दोहे  - राजगोपाल सिंह
बाबुल अब ना होएगी, बहन भाई में जंग
डोर तोड़ अनजान पथ, उड़कर चली पतंग

 
दोहे और सोरठे  - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र | Bharatendu Harishchandra
है इत लाल कपोल ब्रत कठिन प्रेम की चाल।
मुख सों आह न भाखिहैं निज सुख करो हलाल॥

 
वृन्द के नीति-दोहे  - वृन्द
स्वारथ के सब ही सगे, बिन स्वारथ कोउ नाहिं ।
जैसे पंछी सरस तरु, निरस भये उड़ि जाहिं ।। १ ।।

 
कबीर के दोहे | Kabir's Couplets  - कबीरदास | Kabirdas
कबीर के दोहे सर्वाधिक प्रसिद्ध व लोकप्रिय हैं। हम कबीर के अधिक से अधिक दोहों को संकलित करने हेतु प्रयासरत हैं।

 
बिहारी के होली दोहे  - बिहारी | Bihari
होली पर बिहारी के कुछ दोहे

 
कबीर दोहे -3  - कबीरदास | Kabirdas
(41)
गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, का के लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपणे, गोबिंद दियो मिलाय॥

 
माँ पर दोहे | मातृ-दिवस  - रोहित कुमार 'हैप्पी'
जब तक माँ सिर पै रही बेटा रहा जवान।
उठ साया जब तै गया, लगा बुढ़ापा आन॥

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कबीर दोहे -4  - कबीरदास | Kabirdas
समझाये समझे नहीं, पर के साथ बिकाय ।
मैं खींचत हूँ आपके, तू चला जमपुर जाए ॥ 51 ॥

 
होली व फाग के दोहे  - रोहित कुमार 'हैप्पी'
भर दीजे गर हो सके, जीवन अंदर रंग।
वरना तो बेकार है, होली का हुड़दंग॥

 
गोपालदास नीरज के दोहे  - गोपालदास ‘नीरज’
(1)
कवियों की और चोर की गति है एक समान
दिल की चोरी कवि करे लूटे चोर मकान

 
रैदास के दोहे  - रैदास | Ravidas
जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।

 
दोहे | रसखान के दोहे  - रसखान | Raskhan
प्रेम प्रेम सब कोउ कहत, प्रेम न जानत कोइ।
जो जन जानै प्रेम तो, मरै जगत क्यों रोइ॥

 
रोहित कुमार 'हैप्पी' के दोहे  - रोहित कुमार 'हैप्पी'
रोहित कुमार 'हैप्पी' के दोहों का संकलन।

 
बिहारी के दोहे | Bihari's Couplets  - बिहारी | Bihari
रीति काल के कवियों में बिहारी सर्वोपरि माने जाते हैं। सतसई बिहारी की प्रमुख रचना हैं। इसमें 713 दोहे हैं। बिहारी के दोहों के संबंध में किसी ने कहा हैः

सतसइया के दोहरा ज्यों नावक के तीर।
देखन में छोटे लगैं घाव करैं गम्भीर।।

 
डा रामनिवास मानव के दोहे  - डा रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav
डॉ. 'मानव' दोहा, बालकाव्य तथा लघुकथा विधाओं के सुपरिचित राष्ट्रीय हस्ताक्षर हैं तथा विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। उनके कुछ दोहे यहां दिए जा रहे हैं:

 

 

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