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लोक-कथाएं
क्षेत्र विशेष में प्रचलित जनश्रुति आधारित कथाओं को लोक कथा कहा जाता है। ये लोक-कथाएं दंत कथाओं के रूप में एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में प्रचलित होती आई हैं। हमारे देश में और दुनिया में छोटा-बड़ा शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे लोक-कथाओं के पढ़ने या सुनने में रूचि न हो। हमारे देहात में अभी भी चौपाल पर गांववासी बड़े ही रोचक ढंग से लोक-कथाएं सुनते-सुनाते हैं। हमने यहाँ भारत के विभिन्न राज्यों में प्रचलित लोक-कथाएं संकलित करने का प्रयास किया है।

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कंगारू के पेट की थैली - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

कंगारू के पेट की थैली

बहुत पुरानी बात है। उस समय कंगारू के पेट पर थैली नहीं होती थी। विज्ञान इस बारे में जो भी कहे लेकिन इस बारे में ऑस्ट्रेलिया में एक रोचक लोक-कथा है। बहुत पहले की बात है। एक दिन एक मादा कंगारू अपने बच्चे के साथ जंगल में घूम रही थी। बाल कंगारू पूरी मस्ती में था। वह जंगल में पूरी उछल-कूद कर रहा था।
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बन्नो देवी | लोक-कथा - भारत-दर्शन संकलन

बन्नो देवी

हिमालय की गोद में एक गाँव था। वहाँ गद्दी जाति का एक किसान अपने रेवड़ के साथ जा रहा था। वह बहुत ही अच्छी बंसी बजाता था । उसकी बंसी को सुनकर भालू और शेर भी शिकार करना भूल जाते थे ।
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