हिंदी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइये। - बेरिस कल्यएव
लघुकथाएं
लघु-कथा, *गागर में सागर* भर देने वाली विधा है। लघुकथा एक साथ लघु भी है, और कथा भी। यह न लघुता को छोड़ सकती है, न कथा को ही। संकलित लघुकथाएं पढ़िए -हिंदी लघुकथाएँप्रेमचंद की लघु-कथाएं भी पढ़ें।

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अपना-पराया | लघुकथा - हरिशंकर परसाई | Harishankar Parsai

'आप किस स्‍कूल में शिक्षक हैं?'
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निकम्मी औलाद | लघुकथा - रेखा शाह आरबी 

"आइए जगमोहन जी, बैठिए और बताइए क्या हाल-चाल है?" अपने पड़ोसी जगमोहन सिंह  को कुर्सी देते हुए गुप्ता जी ने कहा। 
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दास्तान-ए-भूख - दिलीप कुमार

अक्टूबर का महीना , खेतों में धान की खड़ी फसल मंगरे को दिलासा देती थी, बस चंद दिनों की बात है, फसल कट जाए तो न सिर्फ घर में एक छमाही के लिये  रसद का जुगाड़ हो जाये बल्कि कुछ पुराने कर्ज चुकता हो जाएं तो नए कर्ज पाने की कोई उम्मीद बन सके। 
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समाधान - फ्रेंज काफ़्का

"हाय," चूहे ने कहा, "दुनिया हर दिन छोटी होती जा रही है। शुरुआत में यह इतनी बड़ी थी कि डर गया था। भागते-भागते जब अंततः मुझे दूर दाएँ और बाएँ दीवारें दिखी तो प्रसन्नता हुई लेकिन इन दिनों ये लंबी दीवारें इतनी तेज़ी से संकरी हो गई हैं कि मैं झट से अंतिम छोर में आ पहुंचा हूँ, और वहाँ कोने में ही तो चूहेदान है, जहां मुझे जाना है।"
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विश्वास - सतीशराज पुष्करणा

पत्नी लम्बे समय से बीमार पड़ी थी। लाख यत्न करने पर भी चिकित्सक उसे रोगमुक्त नहीं कर पा रहे थे। पति परेशान था। पत्नी की पीड़ा वह दूर नहीं कर सकता था और उसका रोग शय्या पर इस तरह पड़ा रहना वह और नहीं झेल सकता था। वह क्या करे, क्या न करे? इसी उधेड़बुन में सड़क पर चलते जाते उसने सोचा, ऐसे जीवन से उसे या रोगिनी को भी क्या लाभ हो रहा है!  इससे तो अच्छा है - पत्नी को जीवन से ही मुक्त कर दिया जाए और उसने जहर की एक शीशी खरीद ली। घर पहुँचा। पत्नी ने लेटे-लेटे मुस्कराकर पूछा, “आ गए?"
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