भाषा ही राष्ट्र का जीवन है। - पुरुषोत्तमदास टंडन।

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मुरझाया फूल | कविता

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 सुभद्रा कुमारी

यह मुरझाया हुआ फूल है,
इसका हृदय दुखाना मत ।
स्वयं बिखरने वाली इसकी,
पंखुड़ियाँ बिखराना मत ॥
जीवन की अन्तिम घड़ियों में,
देखो, इसे रुलाना मत ॥


अगर हो सके तो ठण्डी -
बूँदें टपका देना, प्यारे ।
जल न जाए संतप्त हृदय,
शीतलता ला देना प्यारे ॥

- सुभद्रा कुमारी चौहान
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