भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

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एक वाक्य (काव्य)    Print  
Author:धर्मवीर भारती | Dhramvir Bharti
 

चेक बुक हो पीली या लाल,
दाम सिक्के हों या शोहरत --
कह दो उनसे
जो ख़रीदने आये हों तुम्हें
हर भूखा आदमी बिकाऊ नहीं होता है!

-धर्मवीर भारती
[सात गीत वर्ष]

 

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