राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार।

Find Us On:

English Hindi
Loading

रोहित कुमार 'हैप्पी'

रोहित कुमार 'हैप्पी' न्यूज़ीलैंड में हिंदी न्यू मीडिया के माध्यम से हिंदी भाषा, लेखन व साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु प्रयासरत हैं। रोहित मैस्सी यूनिवर्सिटी, न्यूज़ीलैंड से पत्रकारिता  में प्रशिक्षित हैं व इसके अतिरिक्त उन्होंने न्यूज़ीलैंड में इंवेस्टिगेटिव सर्विसिस,  ग्राफिक्स व वेब डिवेलपमैंट में भी प्रशिक्षण लिया।

आप मूलत: कैथल (हरियाणा) से सम्बंध रखते हैं और आप कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर हैं। हिंदी में कविता, ग़ज़ल, कहानी और लघु-कथा विधाओं पर लेखन करते हैं।

रोहित न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित इंटरनेट पर विश्व की पहली हिंदी पत्रिका, 'भारत-दर्शन' का संपादन व प्रकाशन करते हैं व निरंतर हिंदी-कर्म में अग्रसर हैं। यह पत्रिका 1996 से इंटरनेट पर प्रकाशित हो रही है।

 

Author's Collection

1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 [Next] [Last]

Total Number Of Record :63
न्यूज़ीलैंड की हिंदी पत्रकारिता

यूँ तो न्यूजीलैंड में अनेक पत्र-पत्रिकाएँ समय-समय पर प्रकाशित होती रही हैं सबसे पहला प्रकाशित पत्र था 'आर्योदय' जिसके संपादक थे श्री जे के नातली, उप संपादक थे श्री पी वी पटेल व प्रकाशक थे श्री रणछोड़ क़े पटेल। भारतीयों का यह पहला पत्र 1921 में प्रकाशित हुआ था परन्तु यह जल्दी ही बंद हो गया।

...

More...
साक्षात्कार | इनसे मिलिए

रोहित कुमार हैप्पी द्वारा विभिन्न व्यक्तित्वों से साक्षात्कारों का संकलन।

...

More...
अमेरिका में हिंदी सर्वाधिक बोले जाने वाली भारतीय भाषा

अमेरिका जनगणना ब्यूरो ने अमरीका में बोली जाने वाली सभी भाषाओं के आंकड़े जारी किए हैं।

अमेरिका में बोले जाने वाली भारतीय भाषाओं में हिंदी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी बोलने वालों की संख्या लगभग 6.5 लाख है।

...

More...
मीना कुमारी की शायरी

दायरा, बैजू बावरा, दो बीघा ज़मीन, परिणीता, साहब बीबी और गुलाम तथा पाक़ीज़ा जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाली अभिनेत्री मीना कुमारी को उनके अभिनय के लिए जाना जाता है।  मीना कुमारी ने दशकों तक अपने अभिनय का सिक्का जमाए रखा था।  'मीना कुमारी लिखती भी थीं' इस बात का पता मुझे 80 के दशक में शायद 'सारिका' पत्रिका के माध्यम से चला था।

90 के दशक में न्यूजीलैंड में एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान स्व० 'महेन्द्र चन्द्र विनोद शर्मा' ने मीना कुमारी के लेखन का जिक्र किया।  वे मूलतः फीजी से थे।  मुझे केवल आभास भर था कि मीनाकुमारी शायरी भी करती थी, इससे अधिक कुछ नहीं। 

फीजी का एक हिंदी पत्र है, 'शांति-दूत'। इसी के पूर्व संपादक थे, 'महेन्द्र चन्द्र विनोद शर्मा'।  वे ऑकलैंड में स्वयं सेवी के रूप में हिंदी भी पढ़ाते थे यथा बहुत से लोग उन्हें 'मास्टर जी' ही पुकारते थे। एक दिन पुनः आग्रह करने पर उन्होंने मीना कुमारी की एक रचना मुँहजुबानी सुनाई:

"टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
...

More...
जहां रावण पूजा जाता है

विजयादशमी पर भारतवर्ष में रावण के पुतले जलाने के प्रचलन से तो सभी परिचित हैं।  वहीं कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहां रावण पूजनीय है। विदिशा से करीब 45 किमी दूर रावण गांव में  रावण की 12 फीट लंबी पत्थर की प्रतिमा स्थापित है और यहाँ सदियों से रावण की पूजा-अर्चना होती आ रही है। इस परंपरा का आज भी निर्वाह हो रहा है। दशहरे के अवसर पर तो आसपास के लोग भी इस गांव में आते हैैं। यहाँ रावण को 'रावण' संबोधित न कहकर 'रावण बाबा' पुकारा जाता है।

...

More...
हिंदी

हिंदी के कवियों, लेखकों व साहित्यकारों का समारोह चल रहा था। बाहर मेज पर एक पंजीकरण-पुस्तिका रखी थी। जो भी आता उसे उस पुस्तिका में हस्ताक्षर करने थे। सभी आगंतुक ऐसा कर रहे थे। मैं भी पंक्ति में खड़ा था। अपना नम्बर आने पर मैं हस्ताक्षर करने लगा तो पुस्तिका में दर्ज सैंकड़ों हिंदी कवियों, लेखकों व साहित्याकारों के हस्ताक्षरों पर मेरी दृष्टि पड़ी - एक भी हस्ताक्षर हिंदी में नहीं था। हिंदी में रचना करने वाले कवियों, लेखकों व साहित्यकारों का यह कर्म मेरी समझ से परे था।

...

More...
हाइकु - रोहित कुमार हैप्पी

हाइकु


दोस्त है कृष्ण
तुम हर्जाना भरो
सुदामा बन!

#

...

More...
क्या महात्मा गांधी ने भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों को बचाने का प्रयास किया था?

क्या महात्मा गांधी ने भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों को बचाने का प्रयास किया था? उपरोक्त प्रश्न प्राय: समय-समय पर उठता रहा है। बहुत से लोगों का आक्रोश रहता है कि गांधी ने भगत सिंह को बचाने का प्रयास नहीं किया।

...

More...
गाँधीवाद तो अमर है - डा अरूण गाँधी

डा अरूण गाँधी  से बातचीत

डरबन दक्षिण अफ्रीका में जन्में, डा अरूण गाँधी, मोहनदास कर्मचँद ‘महात्मा' गाँधी के पाँचवें पौत्र हैं। दक्षिण अफ्रीका में अपने बचपन में वे अनेक बार हिंसा से साक्षात्कार कर चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के श्वेत और अश्वेत दोनों समुदायों की हिंसा का सामना करतेट्-करते बालक अरूण हिंसा का जवाब हिंसा से देने का मन बनाने लगा था। यही वह समय था जब अरून के माता-पिता ने उन्हें अपने दादा ‘महात्मा गांधी' के पास अहिंसा की शिक्षा लेने के लिए भारत भेजने का निश्चय किया। डा गाँधी आठ पुस्तकें और सैंकड़ों लेख लिख चुके हैं। भारत-दर्शन के संपादक रोहित कुमार ‘हैप्पी' से हुई बातचीत के मुख्य अंशः


...

More...
गाँधी राष्ट्र-पिता...?

कुछ समय से यह मुद्दा बड़ा चर्चा में है, 'गाँधी को राष्ट्रपिता की उपाधि किसने दी?

जब से सूचना का अधिकार आया है कई बार बड़ी विकट परिस्थितियों से सामना हो जाता है और कई बार तो परिस्थितियाँ हास्यास्पद हो जाती हैं। 

...

More...

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश