जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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67वें गणतंत्र-दिवस की संध्या पर राष्ट्रपति का देशवासियों को संदेश

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