जो साहित्य केवल स्वप्नलोक की ओर ले जाये, वास्तविक जीवन को उपकृत करने में असमर्थ हो, वह नितांत महत्वहीन है। - (डॉ.) काशीप्रसाद जायसवाल।

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अरविन्द कुमार | Arvind Kumar

अरविन्द कुमार - हिंदी के शब्द-साधक

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