जो साहित्य केवल स्वप्नलोक की ओर ले जाये, वास्तविक जीवन को उपकृत करने में असमर्थ हो, वह नितांत महत्वहीन है। - (डॉ.) काशीप्रसाद जायसवाल।

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अथ हिन्दी कथा - 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन 10-12 सितंबर, भोपाल

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