वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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स्वतंत्रता-दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का देश को संबोधन (14 अगस्त 2014)

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